मर्द होने की पीड़ा

मेरे अंदर के आदमी को मारने की मैंने खूब कोशिश की, लेकिन वह मरता ही नहीं है, उसे तिरष्कार स्वीकार ही नहीं है, वह नकली मर्दानगी की आड़ में अपनी कमजोरियों को छिपाता है, उसे बार-बार यह दिलासा हम देते रहते हैं, कि बेटा हम मर्द है, मर्द मतलब पिता (सब ही का बाप). वह महिलाओं को मिलने वाली आजादी का पक्षधर हैं, उसे उनका घुमना फिरना, चाट पकोड़ी खाना पसंद हैं लेकिन खुद के साथ. वह उनको सिनेमाघर की कोने वाली सीट पर इसलिए बिठाना चाहता है, ताकि वह वहां अंधेरे का फायदा उठाकर जता सके कि मैं मर्द हूं. मैं कुछ भी कर सकता हूं. तुम्हारी मर्जी और ना की परवाह मुझे कभी नहीं होगी. मैं मर्द जो ठहरा मैं तुम्हें आज़ादी दिलवायुगा पर समानता नहीं. मैं सड़कों गलियों में गालियां बोलूंगा, गालियों में भी में अपनी मर्द होने की निशानियां दूंगा. 


मर्दानगी की आधी सलाखें हमें बचपन से दिखा दी जाती है, जिसके चक्कर में हमें आधा खुला दरवाजा कभी नहीं दिखता



मुझे तुम्हारे साथ रिलेशन में आने का अधिकार है, मैं ही तुम्हें वॉट्सएप की दीवार के उस छोर से पहल करूंगा, तुम मत करना यह सिर्फ मर्दों का काम है, मैं रिलेशन में आकर जब चाहे तुम्हें लताड़ सकता हूं, तुम्हारे ऊपर तरह- तरह की फब्तियां कस सकता हूं. तुम सोच भी लेना यह करने का, तुम्हारी हिम्मत भी नहीं होनी चाहिए, ऐसा कुछ करने की. हम मर्दों को ही हमारे बनाएं मर्द ईश्वर ने वह ताकत दी है, जिसके जरिए सिर्फ हम तुम्हें जब चाहे छोड़ सकते हैं, हम तुम्हारी केयर सिर्फ जब तक करेंगे, जहां तक तुम हमसे पट नहीं जाती, एक बार मेरे हाथ में तुम्हारी ढील आने पर मैं तुम्हें हवा उड़ती पतंग की तरह उड़ने का मौका दूंगा, गगन में। बादलों की सैर करते तुम्हें उस सुख की प्राप्ति होगी, जिसे तुमने कभी महसूस नहीं किया होगा, पर याद रखना मैं मर्द हूं, तुम्हारी ढील मेरे हाथ में है, मुझे जब तुमसे खेलना होगा, मैं तुमसे पेज लड़ाने लग जाउंगा और जब तुमसे मन भर जाएगा, खुले आकाश में तुम्हें अकेला छोड़ दूंगा, तुम चाहे कटकर फिर चाहे किसी के भी हाथ लगो, मेरा क्या है? मैं तो मर्द हूं मेरा मन भरने पर मैं तुम्हें नहीं रख सकता, जब तक नया मांजा मेरे पास है,तब तक पतंग बदलने की आजादी मैंने खुद को दे रखी है.
तुम एक बात याद रखना, तुम खुद से मुझे छोड़ने की भूल मत करना. नहीं फिर ऐसे - ऐसे शब्द मेरे से पहले आएं मर्दों ने भाषा में गढ़ रखे हैं, जिसे सुनकर तुम जी नहीं सकोगी, जिओगी भी तो तुम्हें वह जिल्लत मैं महसूस कराता रहूंगा, जिसको सुनकर - पढ़कर तुम मुझे उसी वॉट्सएप पर ब्लॉक करोगी, जहां कभी मेरे मैसेज पढ़कर तुम खिलखिला उठती थी. हम मर्दों को नमक और शहद का प्रयोग करना खूब आता है. लड़की पटानी हो तो शहद बन जाते हैं और उसके बात तुम्हारे शरीर को कुरेद -कुरेद कर उसमें नमक का छिड़काव करेंगे. तुम इतना याद रखना मैं मर्द हूं, तुम्हें जिस सुंदरता पर नाज है, उसको खत्म करने में एसिड की बोतल अपनी पहुंच में ही रखता हूं, तुम्हारी न तुम्हारी बदसूरती का कारण हो सकती है. इसलिए यह सोचकर मुझे पार करना, मुझे प्रकृति पर तरस नहीं आता, तुम तो मेरे लिए मर्द के हाथों की कठपुतली हो. 

नोट :- मर्द होने की पीड़ा महसूस कर रहा हूं.

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