मौत के बाद न रूह की गंध से एक - दूसरे को पहचाना जाएगा

सिगरेट का एक कश मुंह में लेकर धुएं को गले से सहला ही रहा था, कि वह बोल पड़ी तुम मरना चाहते हो क्या? मैंने कहा हां. जिंदगी मैंने खुद नहीं चुनी थी, यक़ीनन मौत में अपनी खुद चुन चुका हूं, वेंटीलेटर पर मरते समय अपनी आंखों के सामने से जब मैं अपनी पूरी जिंदगी को गुजरते हुए  देखूं तो मुझे गम न हो, कि जिंदगी भी किसी ओर ने दी थी और मौत भी मेरी दूसरे चुन रहे हैं. मैं कभी किसी दूसरे को वह जगह नहीं दूंगा, कि तुम मेरे जज्बातों के साथ खेलों और मैं हार्ट अटैक से मर जाऊं, हां मैंने हर गलती पर दूसरों को कोसने की जगह खुद को जिम्मेदार माना है, मैंने जिसको भी अपना माना, उसने मुझे ऐसा दर्द उपहार में दिया, जिसको बयां करने के लिए शब्द कम है. कई बार लगता है, मेरी आंखों का पानी अब सूख चुका है, जो भीतरी आंसूओं का सरोता होगा, वह शायद सूख गया होगा, उसे अब दोबारा भरने के लिए एक नया जीवन चाहिए, जिसके लिए मुझे मौत चाहिए. मौत से बड़ा सुख दुनिया में कुछ नहीं है, जिंदगी भी नहीं. ईश्वर ने हमें जिंदगी जिन सुखों के लिए दी है, वह सब सुख अब बेमानी है. हकीमों, डॉक्टरों, मंदिरों, दरगाह ऐसी कोई जगह नहीं बची है, जहां जाते से ही कोई अपना दुखड़ा सुनाने न लग जाए. मैं बड़ा नॉमर्ल फील करता था कि मेरे लिए हर परिस्थिति एक जैसी है, अब पता चला कि मैंने सुख तो कभी भोगा ही नहीं, जिसे मैं सुख समझता था, वह किसी दूसरे की आंखों की संतुष्टि थी, जिससे मैं समझता था, कि मैं खुश हूं. मैं चला जा रहा हूं, इस भीड़ में खुद की मौत की तलाश में, अंदाजन मौत जल्द मिलेगी. पहले सोचता था, एक प्रसिद्ध आदमी की मौत मरना बहुत जरूरी है लेकिन अब लगता है, मौत चाहे गरीब की हो या अमीर की.
मौत तो मौत है.

क्या मौत के बाद सूरज ऐसा दिखेगा?


मौत का काम ही है, एक ऐसी नींद जो मुझे इन बदनवीस नज़रों से दूर ले जाएंगी. हे मौत तुझसे वादा है, जब भी मिलूंगा बाहें फैलाए मिलूंगा.मैं जानता हूं, तु वो आखरी चीज है जिसे पाने के बाद मैं किसी ओर को नहीं पा सकता हूं. हे मौत जब भी आना मुस्कुराते हुए आना, मैं तेरा बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं. मौत वह दरवाजा है, जिसके परे रोशनी और अंधेरे का अंतर नहीं है, वहां जाने के मुझे दुनियावी नहीं बनना पड़ेगा, हो सकता है मौत के दरवाजे के पार भैंसे पर बैठा हुआ यमराज नजर आएं या फिर उस दरवाजे को पार करते हुए ही हुरे नाचती गाती मेरा स्वागत करने लग जाएं, वहां झरना होगा, गुलाब के फूल की क्यारियां होगी, बड़ी सी समतल जमीन होगी जिस पर फल और फूल से लदे पेड़ दिख रहे होंगे.फिर सोचता हूं, वह सब तो यहां पर भी है. जो भी हो यह तो तय है वहां माथे पर चिंता की लकीरें नहीं होगी, वहां न किसी का सुख होगा न किसी का रुदन. मौत से परे की जिंदगी चादर की परत से ढकें शरीर जैसी होगी, जो बाहर से जितनी पारदर्शी है, अंदर से उतनी ही खुरदरी भी. वहां मुझे मेरे नाम से नहीं जाना जाएगा, न जेल की बंद कोठरी की तरह मेरे बाप के नाम से पुकारा जाएगा, वहां हर रुह की खुशबू की महक से उसे महसूस किया जाता होगा, मेरी आत्मा की महक दूसरी आत्माओं की गंध से अलहदा होगी, वहां इस दुनिया की तरह किसी व्यक्ति के ऊपर कोई पहचान नहीं टंगी होगी, न ही देश, धर्म, जाति का तमगा वहां ओढ़ा जाता होगा, न ही विचाधाराओं का बिल्ला गले में डाला जाता होगा, असली मायनों में आजादी मौत के बाद ही मिलेगी, उस आजादी को पाने के लिए उस एक चीज को छोड़ना होगा, जिसे हम जिंदगी कहते हैं. चलिए छोड़िए इस दुनिया की जंजीरों को ओर सोचिए मौत की हवा को महसूस कीजिए, वह हवा जिसकी बारीक सी छुहन भी एक बेहतर इंसान हमे बना सकती है, मरने से पहले करने वाले कामों की एक लिस्ट बनाइए जिन सभी से माफी मांगनी है, उनकी लिस्ट पहले बनाइए, जिनसे प्यार पाना है उनकी लिस्ट उसके बाद बनाइए. फिर जाइए उनके पास और कीजिए मिन्नत, याद रखिएगा मरने के बाद आप वहां से यात्रावृत्तांत नहीं भेज सकते हैं, इसीलिए मौत के समय भावनाओं का ज्वार न फूटे इसीलिए उस इमोशन के अकाउंट को मैंटेन कर लीजिए, बाकि जिंदगी मुबारक, मौत जिंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई है, जब भी आएंगी बिछड़े दोस्त की तरह उसे बाहों में भर लेंगे.

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