धर्म : मिथक या सत्य

आर वेंकटरमण एक मर्तबा लंदन गए, वहां उन्होंने लिखे हुए नीरस भाषण में थोड़ा रस लाने के लिए एक कहानी को सुनाया, कहानी यू तो रोमियो जूलियट की थी पर उन्होंने उसमें थोड़ा फेरबदल कर दिया, आर वेंकटरमण ने कहा कि " यह दुखद है कि शेक्सपियर ने अपने नाटक रोमियो और जूलियट का त्रासद अंत किया, जिसमें रोमियो और जूलियट दोनों मर गए। मेरे पास उसी कहानी का संशोधित रूप है और इसमें सिर्फ रोमियो मरता है। इससे जूलियट इतनी दुखी और निराश होती है कि एकदम बेहाल पड़ी रहती है। उसकी सहेलियां उसे सलाह देती है कि वह रोमियो की आत्मा से बात कर ले। इससे उसे राहत मिलेगी। बातचीत शुरू होती है और रोमियो से बात करके खुशी से झूमती जूलियट उस पर सवालों की बौछार कर देती है। वह उससे उसके स्वास्थ्य , खाने, खेलने और आसपास के माहौल के बारे में पूछती है। रोमियो ज़बाब देता है, ' ओह! जूलियट, मैं एक आश्चर्यचकित दुनिया में हूं। यहां खाने के लिए बहुत कुछ है। गीत संगीत, डांस, थियेटर सब कुछ दिन रात चलता रहता है। साथी है, जो समय को जीवंत बना देते हैं... जूलियट को लगता है कि रोमियो स्वर्ग में हैं। उसने कहा ओ रोमियो , स्वर्ग बहुत अच्छी जगह है न! रोमियो ने पलटकर कहा, किसने कहा मैं स्वर्ग में हूं। मैं तो लंदन शहर में हूं। "




पूर्व राष्ट्रपति वेंकटरमन ने यह कहानी लंदनवासियो के मनोरंजन के लिए सुनाई थी पर हर एक कहानी में थोड़ा सा छेड़छाड़ करके एक नई कहानी लिखी जा सकती है. राम की कहानी रामायण में बंद है, जिसे आदिकवि वाल्मीकि ने लिखा है, उसके उत्तरकांड में  जिक्र आया है, कि राजा राम एक शंबूक नामक व्यक्ति को मृत्युदंड की सजा देते है, उसका अपराध इतना था कि उसने शुद्र होने के बावजूद तप करने का साहस किया था, उस जमाने में (त्रेता युग में) शुद्र लोगों के तप करने की मनाही थी, रामराज्य में एक शुद्र को मृत्युदंड मिलना, उस व्यवस्था के प्रति मेरे मन में विद्रोह के स्वर फूटे, जब मैंने शंबूक के विषय में ज्यादा जानने की कोशिश की तो मुझे एक वीडियो मिला, जो नेहरू जी के भारत एक खोज पर आधारित था, उस वीडियो में बताया गया  कि यह राम का अन्याय नहीं बल्कि उस व्यवस्था का दोष है, जिस समय राम रहे होंगे, उसी काल की एक कहानी और है, जिसमें सामाजिक समरसता का संदेश है, उस कहानी का नाम है, तीन पिताओं का पुत्र. जहां एक राजा अपने पूर्वजों के लिए पिण्ड दान के लिए जाता है, तो वहां नदी में से तीन हाथ निकल कर आते हैं, तब राजा और पुरोहित असमंजस में आ जाते हैं, कि मेरे पिता का हाथ कौन सा है? फिर उसे बताया जाता है, कि तुम एक विद्रोही (जो शुद्र था) के लड़के हो, उसने अपने ऊपर हुए अत्याचार के खिलाफ तुम्हें पैदा कराने के लिए तुम्हारी नानी से वचन लिया था, तुम्हारा जन्म एक ब्राह्मण पुरूष और तुम्हारी मां वेश्य से हुआ है, इसीलिए तुम्हारे पिता वह ब्राह्मण है, तुम्हें तुम्हारी मां ने नदी के किनारे छोड़ दिया था, जहां तुम राजा (क्षत्रिय) को मिले थे, उन्होंने तुम्हारा पालन पोषण किया, इसीलिए वह तुम्हारे पिता थे। कहानी के अंत में उस राजा के पिता के तौर पर उस विद्रोही को मान्यता दी जाती है, क्योंकि उसने उसे जीवन का उद्देश्य दिया था.

हमारे देश में कहानियों को काफी पसंद किया जाता रहा है, यही कारण है कि हमारे यहां हर व्रत, पर्व की कहानियां मार्केट में उपलब्ध है, उन कहानियों को किसी ने मान्यता की शक्ल में ले लिया तो किसी ने मिथक कहकर नकार दिया गया. महाभारत की कहानी प्रायः सभी को पता होती है, संस्कृत में एक कवि हुए हैं, उन्होंने महाभारत को नए तरीके से गढ़ा है, उन्होंने महाभारत में युद्ध की जगह संधि को तरजीह दी है, उन्होंने अपनी कहानी में पांडवों और कौरवों में सुलह करवा दी और महाभारत का युद्ध ही नहीं हुआ है.

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