आज की देशभक्ति में गांधी फिट नहीं
मैं गांधीजी को देशभक्त नहीं मानता, आज की देशभक्ति नाथुराम जैसों के लिए ही बनी है, गांधी जी इस देशभक्ति के पैरामीटर में फिट नहीं बैठते, लेकिन जिस व्यक्ति ने गांधी जी की हत्या की उसको आरएसएस ने भी अपनी विचारधारा का मानने से इंकार ही किया है, उस हत्यारे की विचारधारा उसी समय गांधीजी की विचारधारा से हार गई थी, जब उसने गांधीजी के पांव पढ़कर उनपर गोली चलाई थी, जिस व्यक्ति ने आज के साम्प्रदायिकता धुव्रीकरण के शिकार पश्चिम बंगाल में कहा था कि मेरा जीवन ही मेरा संदेश है, उनके जीवन को तो एक भटके हुए
मानसिकता के शिकार ने खत्म कर दिया पर उनके विचारों को आज भी तबाह नहीं किया जा सकता, पिछले दिनों एक भगवा वस्त्र पहने एक भटकी हुई महिला ने गांधी के पुतले को प्रतीकात्मक मौत देने की कोशिश की थी, क्या हुआ? गांधी के विचार न 30 जनवरी 1948 में मरे थे, न 30 जनवरी 2019 को, आज भोपाल से भाजपा प्रत्याशी ने नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया है, उनका बताना लाजिमी भी है, आज के समय में गोडसे जैसे ही एक खास विचारधारा द्वारा महापुरुष बताएं जाते है. यह भी अचरज की बात है कि इस साल गांधी के जन्म के 150 वर्ष यह देश मना रहा है, देश के प्रधानमंत्री और साध्वी जी की पार्टी के सर्वेसर्वा मोदी जी ने गांधी जी के ऊपर एक लेख लिखा है, जिसका शीर्षक है "बापू आज भी करोड़ों लोगों के लिए आशा की किरण" है जिसमें वह लिखते है कि " 21 वी सदी में भी गांधी के विचार उतने ही प्रासंगिक है, जितने उनके समय में थे और वह ऐसी अनेक समस्याओं का समाधान कर सकते हैं, जिनका सामना आज विश्व कर रहा है।"
मोदी जी के विचार उन्ही के खेमे में प्रचारित नहीं हो पाएं है जबकि उनका एक एक शब्द सोशल मीडिया पर हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता है, शायद अपशब्दों की लहर में गांधी के विचार मोदी के मुख से भी लोग सुनना पसंद नहीं करते है.
आज कल सोशल मीडिया पर कमल हासन का विरोध करते हुए स्वामी श्रद्धानंद को मारने वाले व्यक्ति को पहला आतंकवादी बताने में लोग जुटे हुए है, श्रद्धानंद की हत्या के बाद आर्य समाज ने क्या किया? यह जानना भी विशेष है, उन्होंने आर्य वीर दल की स्थापना की, जो नवयुवकों को शस्त्र और शास्त्र की शिक्षा दीक्षा देता है, मैं उसके एक शिविर में हिस्सेदारी करके आया हूं, उन्होंने अपने संयासियों को भी शस्त्र विद्या में निपुण किया ताकि वह बुद्धि के साथ साथ बाहुबल में भी निपुण हो, लेकिन गांधी के शरीर के समाप्त होने के बाद कांग्रेस ने कोई शस्त्र सेना नहीं बनाई क्योंकि गांधी अहिंसा में यकीन रखते है, यह अलग बात है कि उस हाड़ मांस के पुतले के विचार की जरूरत नेल्सन मंडेला से लेकर जेपी तक को होती है.

संघ भी बताता है कि गांधी जी संघ की शाखा में गए थे और उन्होंने उनके अनुशासन की तारीफ भी की थी, संघ के पत्रकों में छपने वाली उपलब्धियों में 1963 में गणतंत्र दिवस परेड में स्वयंसेवकों का मार्च है, जो मौका उन्हें संघ की विचारधारा के पीएम अटल बिहारी वाजपेई जी या नरेंद्र मोदी जी ने दिया बल्कि गांधी वादी और जिनको रोजाना यह विचारधारा कोसती है उस जवाहर लाल नेहरू जी ने ही उन्हें यह अवसर दिया, यह विचार गांधी के है, जहां यदि प्रतिस्पर्धी विचारधारा भारत चीन युद्ध के समय देश हित में काम करती है तो उन्हें राष्ट्रीय फलक पर सम्मानित किया जाता है, यह गांधी के विचार ही है जहां
जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी, नेहरू जी के मंत्रिमंडल का हिस्सा होते है, यक़ीनन यह कहने सुनने का असर नहीं पड़ने वाला है, क्योंकि जहां देशभक्त गोडसे हो वहां गांधी मन में ही रमते है.
नोट :- अभी न्यूज नेशन में प्रियंका गांधी का रोड शो दिखाया जा रहा है, जहां एक वॉइस ओवर में चरखे से बनी सूत की माला को सफेद कपड़ा बताया गया है, जहां गांधी वादी सत्कार के तरीके को लोग भूल गए है, वहां नाथूराम देशभक्त हो ही सकता है.
मानसिकता के शिकार ने खत्म कर दिया पर उनके विचारों को आज भी तबाह नहीं किया जा सकता, पिछले दिनों एक भगवा वस्त्र पहने एक भटकी हुई महिला ने गांधी के पुतले को प्रतीकात्मक मौत देने की कोशिश की थी, क्या हुआ? गांधी के विचार न 30 जनवरी 1948 में मरे थे, न 30 जनवरी 2019 को, आज भोपाल से भाजपा प्रत्याशी ने नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया है, उनका बताना लाजिमी भी है, आज के समय में गोडसे जैसे ही एक खास विचारधारा द्वारा महापुरुष बताएं जाते है. यह भी अचरज की बात है कि इस साल गांधी के जन्म के 150 वर्ष यह देश मना रहा है, देश के प्रधानमंत्री और साध्वी जी की पार्टी के सर्वेसर्वा मोदी जी ने गांधी जी के ऊपर एक लेख लिखा है, जिसका शीर्षक है "बापू आज भी करोड़ों लोगों के लिए आशा की किरण" है जिसमें वह लिखते है कि " 21 वी सदी में भी गांधी के विचार उतने ही प्रासंगिक है, जितने उनके समय में थे और वह ऐसी अनेक समस्याओं का समाधान कर सकते हैं, जिनका सामना आज विश्व कर रहा है।"
मोदी जी के विचार उन्ही के खेमे में प्रचारित नहीं हो पाएं है जबकि उनका एक एक शब्द सोशल मीडिया पर हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता है, शायद अपशब्दों की लहर में गांधी के विचार मोदी के मुख से भी लोग सुनना पसंद नहीं करते है.
आज कल सोशल मीडिया पर कमल हासन का विरोध करते हुए स्वामी श्रद्धानंद को मारने वाले व्यक्ति को पहला आतंकवादी बताने में लोग जुटे हुए है, श्रद्धानंद की हत्या के बाद आर्य समाज ने क्या किया? यह जानना भी विशेष है, उन्होंने आर्य वीर दल की स्थापना की, जो नवयुवकों को शस्त्र और शास्त्र की शिक्षा दीक्षा देता है, मैं उसके एक शिविर में हिस्सेदारी करके आया हूं, उन्होंने अपने संयासियों को भी शस्त्र विद्या में निपुण किया ताकि वह बुद्धि के साथ साथ बाहुबल में भी निपुण हो, लेकिन गांधी के शरीर के समाप्त होने के बाद कांग्रेस ने कोई शस्त्र सेना नहीं बनाई क्योंकि गांधी अहिंसा में यकीन रखते है, यह अलग बात है कि उस हाड़ मांस के पुतले के विचार की जरूरत नेल्सन मंडेला से लेकर जेपी तक को होती है.

संघ भी बताता है कि गांधी जी संघ की शाखा में गए थे और उन्होंने उनके अनुशासन की तारीफ भी की थी, संघ के पत्रकों में छपने वाली उपलब्धियों में 1963 में गणतंत्र दिवस परेड में स्वयंसेवकों का मार्च है, जो मौका उन्हें संघ की विचारधारा के पीएम अटल बिहारी वाजपेई जी या नरेंद्र मोदी जी ने दिया बल्कि गांधी वादी और जिनको रोजाना यह विचारधारा कोसती है उस जवाहर लाल नेहरू जी ने ही उन्हें यह अवसर दिया, यह विचार गांधी के है, जहां यदि प्रतिस्पर्धी विचारधारा भारत चीन युद्ध के समय देश हित में काम करती है तो उन्हें राष्ट्रीय फलक पर सम्मानित किया जाता है, यह गांधी के विचार ही है जहांजनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी, नेहरू जी के मंत्रिमंडल का हिस्सा होते है, यक़ीनन यह कहने सुनने का असर नहीं पड़ने वाला है, क्योंकि जहां देशभक्त गोडसे हो वहां गांधी मन में ही रमते है.
नोट :- अभी न्यूज नेशन में प्रियंका गांधी का रोड शो दिखाया जा रहा है, जहां एक वॉइस ओवर में चरखे से बनी सूत की माला को सफेद कपड़ा बताया गया है, जहां गांधी वादी सत्कार के तरीके को लोग भूल गए है, वहां नाथूराम देशभक्त हो ही सकता है.
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