2019 का मुद्दा विहीन चुनाव
देश में चुनावी माहौल है, यह वह समय होता है, जब सिर्फ नेता और उनके बयान सुर्खियों में होते है, उनके अलावा सारे मुद्दे शिथिल हो जाते है, पिछले दिनों में इटारसी तक ट्रेन से सफर कर रहा था, वहां मुझे एक छिंदवाड़ा कलेक्टर कार्यालय में काम करने वाला चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी मिला, वह बातो में ही खुद के द्वारा भ्रष्टाचार करने के नुस्खे मुझसे साझा कर रहा था, कि वह किस तरह अपनी शाखा में आएं बुर्जुगों के परिचय पत्र बनाने का काम बड़ी आसानी से कर देता है, उसके लिए वह चार सौ से पांच सौ रुपए जरूर ले लेता है, वह व्यक्ति बेईमानी के पैसों में खुश है लेकिन उसमें स्वीकारने की अच्छाई भी है, उसके पहले ट्रेन की यात्रा में मुझे एक जयपुर ग्रामीण का युवा वोटर मिला था, जो राजवर्धन सिंह द्वारा क्षेत्र में खेल को प्रमोट करने की नीतियों की तारीफ कर रहा था, वह भुसावल में प्रतियोगी परीक्षा में हिस्सा लेने गया था, जहां फीजिकल में रिजेक्शन झेलकर वह अपने घर जा रहा था, उसे बेरोजगारी परेशान करती है, उसे रोजगार चाहिए ताकि वह अपने गांव में खुद के परिवार की छवि दुरस्त कर सके, उसी यात्रा में मुझे एक पूर्व कॉन्स्टेबल मिला, जो राजस्थान में कार्यरत था, वह भाजपा के एक नेता का खास था, जो रसूखदार लोगों से परेशान होकर अलवर के पास ग्रामीण अंचल में सरकारी शिक्षक है, वह बता रहा था, कि साहब हमारे स्कूल में बच्चियों के लिए सेनेटरी पेड आएं, अब राजस्थान में गांव का कस्टम तो सब जानते ही है, हम बच्चियों से सीधे बात कर नहीं सकते थे, हमने गांव की पंचायत में महिला सचिव को बुलाकर बच्चियों को पेड देने को कहा, छः महीने हो गए है लेकिन एक भी बच्ची ने सामान को छुआ भी नहीं है.
जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सतपाल मलिक एक परिचर्चा में कह रहे थे, कि व्यक्ति अपनी पहली नौकरी या तैनाती में हमेशा ईमानदार होता है, दिक्कत दूसरी तैनाती में होती है, जब वह भ्रष्ट लोगों में भ्रष्ट बनने को ही बेहतर समझता है, जम्मू कश्मीर में सरकारी बैंक की वैकेंसी निकली, उसमें मेरिट के आधार पर बच्चों का चयन हुआ, जब बच्चे बैंक के दरवाजे पर जॉब ज्वाइन करने जाने वाले थे, उतने में उन्हें खबर लगी की नौकरी तो किसी और की लग गई है, क्या करते सब बच्चे घर पर लाचार बैठ गए कुछ लोगों ने आवेदन बनाकर राज्यपाल के घर का दरवाजा खटखटाया, राज्यपाल उनसे मिले उन्होंने जानना चाहा कि आखिरकार ज्यादा नंबर लाने पर भी इन्हें नौकरी क्यों नहीं मिली? तो उन्हे पता चला कि विधायकों व अन्य रसूखदार व्यक्तियों ने अपनी सिफारिशें व कोटे के आधार पर उनकी नौकरियां हड़प ली, राज्यपाल ने उन योग्य युवाओं को नौकरियां दिलवाई.
प्रधानमंत्री आवास योजना से देश में क्रांतिकारी बदलाव हुए है, बहुत से गरीब व्यक्तियों को आसरा इस योजना के तहत मिला है, पूर्ववती सरकारों ने भी काफी घर उपलब्ध करवाएं थे पर इस बार पारदर्शिता ज्यादा थी, इस चुनाव में यदि लोग मोदी के साथ है, तो उसमें इस सरीखे अच्छे काम शामिल है, एनडीए सरकार ने एक स्त्री स्वाभीमान योजना शुरू की थी उसमें आंगनबाड़ी के माध्यम से महिलाओं को विटामिन की गोलियां और सेनेटरी किट दी जानी थी, लेकिन जमीनी स्तर पर लोग इस योजना से अवगत ही नहीं हो पाएं, ऐसा ही दीनदयाल ग्रामीण युवा कौशल विकास योजना का भी रहा, यह ग्रामीण युवाओं की स्किल्स डेवलप करने के लिए बनाई गई थी, यह योजना सिर्फ कागजों में ही सिमट गई, खेर सौभाग्य योजना के जरिए गांव के टोलो तक बिजली पहुंच गई, माना अभी की घरों तक बिजली नहीं पहुंची है लेकिन टोलो तक खंबे लगा दिए गए है, इस काम में काफी जटिलताएं थी, पहाड़ी इलाकों तक पहली मर्तबा बिजली पहुंची है, मैंने गांव में सो रहे एक बुर्जुग को हाथ में टॉर्च लेकर सोते हुए देखा क्योंकि वह ही अंधेरे में उनके लिए सहारा था, उनकी अस्सी वर्ष की आयु तक गांव बिजली से दूर था, अब खंबे लगे है, जब उनके जीवन की लो बूझने को है.
यह सब लिखने की वजह यह है कि भ्रष्टाचार, रोजगार आवास, बिजली जैसे मुद्दे चुनाव से गायब है, चुनाव लगभग समाप्ति पर है, कुछ समय में प्रथम सेवक कौन बनेगा तय हो जाएगा? यकीनन जो भी सरकार बनेगी विकास तो करेंगी ही, आवश्यकता हमें है, कि हम जागरूक हो जाएं, मुद्दों पर बात करने वाले को ही सुने, भावुकता तो निर्मल वर्मा के साहित्य में भी मिल जाएंगी.
नोट:- जो अंत तक पढ़ने की हिम्मत कर रहे है, उनका शुक्रिया.
जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सतपाल मलिक एक परिचर्चा में कह रहे थे, कि व्यक्ति अपनी पहली नौकरी या तैनाती में हमेशा ईमानदार होता है, दिक्कत दूसरी तैनाती में होती है, जब वह भ्रष्ट लोगों में भ्रष्ट बनने को ही बेहतर समझता है, जम्मू कश्मीर में सरकारी बैंक की वैकेंसी निकली, उसमें मेरिट के आधार पर बच्चों का चयन हुआ, जब बच्चे बैंक के दरवाजे पर जॉब ज्वाइन करने जाने वाले थे, उतने में उन्हें खबर लगी की नौकरी तो किसी और की लग गई है, क्या करते सब बच्चे घर पर लाचार बैठ गए कुछ लोगों ने आवेदन बनाकर राज्यपाल के घर का दरवाजा खटखटाया, राज्यपाल उनसे मिले उन्होंने जानना चाहा कि आखिरकार ज्यादा नंबर लाने पर भी इन्हें नौकरी क्यों नहीं मिली? तो उन्हे पता चला कि विधायकों व अन्य रसूखदार व्यक्तियों ने अपनी सिफारिशें व कोटे के आधार पर उनकी नौकरियां हड़प ली, राज्यपाल ने उन योग्य युवाओं को नौकरियां दिलवाई.
प्रधानमंत्री आवास योजना से देश में क्रांतिकारी बदलाव हुए है, बहुत से गरीब व्यक्तियों को आसरा इस योजना के तहत मिला है, पूर्ववती सरकारों ने भी काफी घर उपलब्ध करवाएं थे पर इस बार पारदर्शिता ज्यादा थी, इस चुनाव में यदि लोग मोदी के साथ है, तो उसमें इस सरीखे अच्छे काम शामिल है, एनडीए सरकार ने एक स्त्री स्वाभीमान योजना शुरू की थी उसमें आंगनबाड़ी के माध्यम से महिलाओं को विटामिन की गोलियां और सेनेटरी किट दी जानी थी, लेकिन जमीनी स्तर पर लोग इस योजना से अवगत ही नहीं हो पाएं, ऐसा ही दीनदयाल ग्रामीण युवा कौशल विकास योजना का भी रहा, यह ग्रामीण युवाओं की स्किल्स डेवलप करने के लिए बनाई गई थी, यह योजना सिर्फ कागजों में ही सिमट गई, खेर सौभाग्य योजना के जरिए गांव के टोलो तक बिजली पहुंच गई, माना अभी की घरों तक बिजली नहीं पहुंची है लेकिन टोलो तक खंबे लगा दिए गए है, इस काम में काफी जटिलताएं थी, पहाड़ी इलाकों तक पहली मर्तबा बिजली पहुंची है, मैंने गांव में सो रहे एक बुर्जुग को हाथ में टॉर्च लेकर सोते हुए देखा क्योंकि वह ही अंधेरे में उनके लिए सहारा था, उनकी अस्सी वर्ष की आयु तक गांव बिजली से दूर था, अब खंबे लगे है, जब उनके जीवन की लो बूझने को है.
यह सब लिखने की वजह यह है कि भ्रष्टाचार, रोजगार आवास, बिजली जैसे मुद्दे चुनाव से गायब है, चुनाव लगभग समाप्ति पर है, कुछ समय में प्रथम सेवक कौन बनेगा तय हो जाएगा? यकीनन जो भी सरकार बनेगी विकास तो करेंगी ही, आवश्यकता हमें है, कि हम जागरूक हो जाएं, मुद्दों पर बात करने वाले को ही सुने, भावुकता तो निर्मल वर्मा के साहित्य में भी मिल जाएंगी.
नोट:- जो अंत तक पढ़ने की हिम्मत कर रहे है, उनका शुक्रिया.
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