कांग्रेस में दिक्कत क्या है?

कांग्रेस में दिक्कत क्या है? इतनी अच्छी तो पार्टी है, सभी विचारों के धड़ों को एक साथ धोती है, स्वतंत्रता आंदोलन में तपी पार्टी है, लगभग 70 साल आजादी के लिए संघर्ष किया और तकरीबन उतने ही साल सत्ता के शीर्ष पर रही है, फिर ऐसा क्या हो गया कि देश इस पार्टी से चिढ़ने लग गया, गली चलते लोग कांग्रेस पार्टी की बुराई में दस बातें करते दिखते है, चाहे उनके विरोध के पांइट किसी खास विचारधारा के वॉट्सएप गुर्प से ही उपजे हो.
सही मायने में उनके पाइंट जायज है, मेरे एक परिजन की मृत्यु की घड़ी नजदीक थी, उन्हें उसका पूर्वानुमान हुआ, उन्होंने अपने परिजनों को बुलाया और कहा कि तुम्हे मेरी सौगंध है, जब भी चुनाव हो दो बैलों की जोड़ी को ही वोट देना, तब कांग्रेस का चुनाव चिन्ह यही था, वह तो अपनी देह छोड़कर चले गए पर कांग्रेस तब दो बेलो की जोड़ी से आज गाय बछड़ा और पंजे तक का सफर तय कर चुकी है, कांग्रेस जिस गांधीवादी विचारधारा पर खरे उतरने की बात करती है, वह आजादी के बीस वर्षों में ही इस पार्टी से गायब हो गई, जब सत्ता का नशा चढ़ता है सबसे पहले घर को ही तबाह करता है, यही फॉर्मूला इस पार्टी के साथ हुआ, हमने सुना है पहले कांग्रेसी कार्यकर्ता सेवा दलों के शिविरों में ट्रेंड होकर पार्टी ज्वाइन करते थे, सुबह प्रभातफेरी निकलती थी जिसमें कार्यकर्ता लोगों के साथ साथ देश जगाने की अलख पैदा करते थे, लेकिन अब नजारा अलग है, तरूण अवस्था में छात्र राजनीति का चस्का लगा, यहां वहां नजरे तलाश कर एनएसयूआई के कुछ नेता कम कार्यकर्ताओं से संपर्क हुआ, अपराधी तबके के गुलामनुमा उन भाई लोगो के लिए राजनीति मतलब रैली होती थी, जहां हर गाड़ी में 30 का पैट्रोल और हर हाथ में एक सिगरेट थमानी होती थी, क्या करते अपने खींसे में न इतने रूपए थे, न इतनी हैसियत, एबीवीपी ज्वाइन की दरी बिछाने से लेकर रचनात्मक कार्यक्रम में शिरकत करने का मौका मिला, खुद की विचारधारा की सरकार होने के बावजूद सरकार विरोधी प्रदर्शन यहां करने को मिल जाया करते है.
छोटे जिलों में कांग्रेस बाहुबलियों और नामदारों की बपौती है, जिनके पास तीन सौ, चार सौ एकड़ जमीन होती है, पीढ़ियों से उनके परिवार से जनप्रतिनिधि निकलते है, जमीनी स्तर पर वह स्वयं को सामंत समझते है, कांग्रेस पार्टी कैंडर वाली पार्टी नहीं है, यह एक विचार है, राहुल गांधी इसी विचार पर सवार होकर मोदी की सत्ता को चुनौती देते है, यह अलग बात है इस विचार पर चार पीढ़ियों से एक परिवार का कब्जा है, जो समय समय पर विचार से बढ़कर दिखती है, एक अपरोक्ष रूप से राजनीति से जुड़े एक व्यक्ति से बातचीत के कुछ अंश साझा कर रहा हूं, वह समाजसेवा करते है और भविष्य में जनप्रतिनिधि बनने का सपना देखते है, उनको मोदी शाह पसंद नहीं है, जबकि वह चुनाव भाजपा से लड़ना चाहते है, उनका कहना है इस पार्टी में कार्यकर्ताओं की सुनवाई है वहीं भाजपा में नेता नहीं कार्यकर्ता चुनाव लड़ते है.
कांग्रेस के पहले अध्यक्ष डब्ल्यू सी बनर्जी बंगाल से आते थे आज बंगाल में कांग्रेस चौथे पायदान पर है, पार्टी के वर्तमान अध्यक्ष राहुल गांधी यूपी से सांसद है, वहां भी यह चौथे नंबर की पार्टी है, कांग्रेस से अलग होकर सैकड़ों पार्टीयां बनी जो सत्ता के शीर्ष को छूती रहती है, कांग्रेस आज सामंतों का एक हुजूम है, फलां राज्य का ठिमका परिवार इनका प्रमुख होता है, उन सामंतों पर एक निजाम काबिज है, जो हर दूसरे सामंत को दिल्ली बुलाकर प्रोत्साहित करता है, यहां लड़ाई सामंतों की है, निजाम तो हमेशा एक ही परिवार का रहना है.

नोट:- एक राजनीतिक विश्लेषक का तर्क है देश के लिए एक ही पार्टी बनी है, जिसका हर भाषा, राज्य, जिले में प्रतिनिधित्व है, यह पंथनिरपेक्ष दल है जो कि देश के अनुरूप है.

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

न्याय की देवी की आंख पर पट्टी क्यों?

मथुरा की लड़की और गोकुल की गाय कर्म फूटे तो अंत ही जाएं (1930 के दशक की कहानी)

यह देख, गगन मुझमें लय है, यह देख, पवन मुझमें लय है,