डायन अम्मा
डायन अम्मा शुभम शर्मा सिंहपुर शहर में बसा एक गांव गोरखपुर जो खुद में कई रंग समेटे हुए है, वैसे तो यह गांव अन्नदाताओं का पनाहगार है पर धर्मों के बहुतरे रंग यह खुद में समेटे हुए है, गांव में तकरीबन ग्यारह सौ हिंदू है और यही तादाद इस्लाम को मानने वालों की भी है. हिंदू मुस्लिम के बराबर संख्या में होने पर भी यहां कभी दंगा फसाद नहीं हुआ है। 1992 में जब कारसेवकों का जत्था पूरे जिले के गांवों से जा रहा था, तब यहां के रहवासी नजदीकी पीर हैदरी की दरगाह पर सबकी सलामती की दुआएं मांग रहे थे, देश में जब भी यह दो कौमे आपस में लड़कर एक दूसरे के लहू को बहाने में आमादा होती है, यहां की गंगा जमुनी तहजीब के कारण यहां ऐसी स्थिति आज तक नहीं आई है, गांव के बुजर्ग बताते है, कि गांव में 18 वी सदी में पीर हैदरी आएं तो उन्होने अपने उस्ताद ख्वाजा मुईनोद्दीन चिश्ती के अमन के पैगाम को पूरे क्षेत्र में फैलाया, उनके कर्म से ही गांव में जो सर्राफा बाजार है, वह मस्जिद की तह में ही रचा बसा है और पीढियों से सुनार और बनियें अपनी दुकाने को यहां चला रहे है, वह हर महीने आठ सौ से डेढ़ हजार तक का किराया मस्जिद में जमा...