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2016 यात्रा वृतान्त

साल २०१६ मेरे लिए विशेष था, वैसे तो हर दिन आपके लिए कुछ खास होता है पर यह वर्ष खट्टे-मीठे अनुभवों के लिए अतुलनीय रहा है | २०१६ की शुरूआत मेरे लिए बहुत रोमांचित रही मैने इस वर्ष ब...

पत्र टु पी.एम

भारत के माननीय प्रधानमंत्री जी नमस्कार मैं आप को दूसरा पत्र लिख रहा हुँ, मैनें आपको पहला पत्र नशे की रोकथाम के लिए लिखा था जो आपको प्राप्त हुआ होगा ऐसी मैं आशा करता हुँ खैर म...

उमंग

पैरो को जम़ीन से थामे रखा है मैने रिश्तों को खुटी से बांधे रखा है | लाख ऱजिशे की मुझे उकसाने की पर मैने अभी भी होश को संभाले रखा है | जज्बा , काबिलियत , उमंग भी है पर मैने अभी भी लोग...

चूड़ी तो बस श्रृंगार है उसका, वो तलवार चलाना भी जानती है |

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चूड़ी तो बस श्रृंगार है उसका, वो तलवार चलाना भी जानती है | जब मुश्किलो में घिरते हम हौसला बढ़ाना भी जानती है, गुस्सा, प्यार- दुलार, डाँट कभी बेलन से भी देती मार पर रोता देख बच्चे ...

लीला पुरूषोत्तम :- श्री कृष्ण

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हमारे भारतवर्ष में सबसे ज्यादा सनातन धर्मी जिस ईश्वर विशेष की उपासना करते है वह है भगवान विष्णु के नौवे अवतार यदुवंशी वासुदेव जी और माता देवकी के आठवे पुत्र श्रीकृष्ण जि...

जरा याद करो कुर्बानी

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हम भारतीयों की आस्था प्रतीक चिन्हों में ज्यादा केन्द्रित रहती है | हमे हमारे अस्तित्व के बारे में हमेशा दूसरे व्यक्ति ने जागृत किया है | रामायण काल में जामवंत ने हनुमान जी को उनकी शक्ति का अहसास कराया और वह अपने सामर्थय को समझकर समुद्र लांघ कर लंका पहुँचे थे | ठीक वैसा ही अस्तित्व जागरण का काम महाभारत में अर्जुन का गाण्डीव गिरते देख श्रीकृष्ण ने किया था |.  आद्यशंकराचार्य को शास्वत ज्ञान भी एक चण्डाल ने ही दिया था | थोड़ा अटपटा लगता है पर यह सच है कि हमे हमारे बारे में हमेशा दूसरा ही बताता है हम अपनी उदासीनता के कारण कभी स्वयं को जान ही नहीं पाते है |. हमे अग्रेजी हुकूमत से आजाद हुए 70 वर्ष हो गए है हमारी आजादी अब वृद्ध हो गई है, हमें आजाद होते देखने वाली कई आँखे अब बंद हो चली हैं | हमारे बीच उन लोगो की तादाद ज्यादा है जो आजाद भारत में पैदा हुए है, यह वह पीढ़ी है जिन्होने कभी न भारत माता को अंग्रेजी दासता की जंजीरो में जकड़ा देखा है , ना ही उन जंजीरो को तोड़ते क्रांतिकारियों को लाठी, गोली खाते देख अपने दिल को न सीने से बाहर आते देखा है |. फाँसी के तख्तो पर जब कोई क्रांतिकारी झूल...

तुक़

व्यस्त है अपनी व्यस्ताओं में दो पल के सुकून की तलाश में... प्रियसी निहारन हम चले कन्या मिली न कोएं ऐसी प्रियसी चाहिए जो प्रिया निंहारन होए |                            शुभम

पछतावा

अक्सर मुझे मेरे परिचित्त संचेत करते है कि मैं लोगों को घूर कर या यू कहे की गुस्से वाली नज़रों से देखता हुँ ़ हां भाई हो सकता है कि यह मेरे अंदाजे - ए - बय़ा का  जऱिया बन गया हो पर...

भारत की राजनीति में बढ़ती चमचचो की तादाद

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राजनीति में बढ़ती चमचागिरी आज के समय में राजनीति के मायने बदल गए है पहले राजनीति समाजसेवा का जऱिया था पर आज राजनीति प्रसिद्धी पाने का साधन बन गया है | पहले तो राजनीति की तर...