भारत की राजनीति में बढ़ती चमचचो की तादाद

राजनीति में बढ़ती चमचागिरी

आज के समय में राजनीति के मायने बदल गए है पहले राजनीति समाजसेवा का जऱिया था पर आज राजनीति प्रसिद्धी पाने का साधन बन गया है | पहले तो राजनीति की तरफ लोगो का रूझान कम है और जिनका है भी वह राजनीतिक ग्लैमर के आकर्षण के कारण इस और आते है और इसके लिए वह लोग उपयोग  करते है चमचागिरी का गुण हां चमचागिरी एक कला है जो कि जन्मजात अर्जित प्रतिभा है और बड़ी मेहनत से अर्जित की जाती है  | वैसे तो चमचागिरी और नेताओं का चोली-दामन का साथ है पर यह चमचागिरी आज जोरों पर है | ग्लैमरप्रेमी नेता किसी बड़े नेता की जी हजुरी से अपनी राजनीति प्रारंभ करते है जो बाद में जाकर किसी पद पर जाकर खत्म होती हैं | छोटे शहरों में एयरपोर्ट पर लगने वाली कार्यकर्ताओं की भीड़ में ग्लैमर प्रेमी नेता ज्यादा होते है | आप गाड़ियों की संख्या और उस पर लगे झण्ड़ों से अंदाजा लगा सकते है कि कौन सी पार्टी का और कितना बड़ा नेता प्रवास पर आ रहा है |   जब कोई विद्यायक या मंत्री अपने दौरे पर जो कि अधिकतर भूमि पूजन करने ही क्षेत्र में जाते है उनके आने से पूर्व उनके खास लोग जो कि स्थानीय नेता  होते है या यू कहे कि चमचे होते है उनका काम ही अपने साब को खुश करने के लिए भीड़ इक्टठा करना , अपने साब की जय के नारे लगवाना हा सबसे जरूरी काम तो उन चमचों का होता है कि अपने साब की फोटों खीचना जो कि वह सोशल मीडिया पर डाल सके | बस इन्ही चमचों पर टिकी हमारे देश की राजनीति और बड़े नेताओं की साख |

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