2016 यात्रा वृतान्त
साल २०१६ मेरे लिए विशेष था, वैसे तो हर दिन आपके लिए कुछ खास होता है पर यह वर्ष खट्टे-मीठे अनुभवों के लिए अतुलनीय रहा है |
२०१६ की शुरूआत मेरे लिए बहुत रोमांचित रही मैने इस वर्ष बहुत से ऐसे काम किए जिन्हे मैं करना चाहता था, या बहुत समय से उन कार्यो से दूरी बनाए हुआ था |
न्यायिक प्रक्रिया का ज्ञान
जनवरी २०१६ में थाने और भोपाल जेल के चक्कर लगाने से वर्ष की शुरूआत हुई २०१६ में भोपाल के लगभग सभी थानों मे मेरा जाना हुआ , कही चोरी का आवेदन देने के लिए तो कही दोस्त की गाडी छुडवाने के लिए थानों में हाजरी लगानी पड़ी है |
इस वर्ष सड़क से लॉकप तक की यात्रा करनी पडी वह भी छात्र राजनीति का हिस्सा है |
थानों और न्यायिक प्रक्रिया का इस वर्ष काफी ज्ञान मुझे प्राप्त हुआ वैसे भी इंसान स्वयं के अनुभवों से ही सिखता है |
मुचलके या गवाही जैसे शब्दो का मैं प्रत्यक्ष रूपान्तरण कर पाया |
यात्रा
इस वर्ष मैनें अपने ननिहारे मथुरा की फरवरी और जून में दो बार यात्रा की जहां मे ८ वर्षो से नहीं गया था , गोवर्धन महाराज ने इस बार एक - साथ दो परिक्रमा लगवा ही ली अब डंडोत्री लगाने की इच्छा है गोवर्धन महाराज जब चाहेगे यह मनोकामना भी पूर्ण हो जाएगी |
इस बार बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में सिंहस्थ का आयोजन था जिसका मैं भी एक हिस्सा रहा | इस वर्ष उज्जैन में तीन बार बाबा महाकाल ने बुलाया , जिनमें से एक बार जनवरी में और दो बार मई में सिहस्थ के समय ही जाना हुआ | माँ क्षिप्रा और नर्मदा के संगम में अमृत डुबकी लगाने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ | विचार महाकुम्भ में बाबा महाकाल के आर्शीवाद से संगीत वर्मा सर और नेहा तिवारी मेम की प्रदर्शनी 'काल क्षेत्र और उज्जयिनी' में भारत की विचारपरम्परा का भागीदार बनने का अवसर भी प्राप्त हुआ |
उज्जैन के अलावा इंदौर,बडौदा,सिहोर,रायसेन आदि स्थलों में भी जाना हुआ पर दादी के गिरते स्वास्थ्य और अपने दायित्वों के कारण दो दिन से अधिक कही भी नहीं रूका |(कुछेक अपवादों को छोड़कर )
कुछ और अनकहीं
इस वर्ष आखिरकार मैनें एक वाहर Mestro क्रय कर ही ली ३ वर्षों तक बचत कर- कर के एक साथ इतनी राशी को एक साथ देकर मेरी आँखे नम थी पर मित्र गजेन्द्र और नरेश के कहने पर मैनें यह फैसला लिया , अप्रैल में गाडी क्रय की पर घर पर जून में बताया, कि भैया मैने एक वाहन क्रय कर लिया है |
इस वर्ष कुल मिलाकर तीन एकसीडेन्ट हुए , दो चालान कटे पर एक माह {अग्रस्त) में हुए एक्सीडेन्ट में अंदरूनी चोट से उबरने में ही २०-२२ दिन लग गए क्योकि जब आप बिस्तर से उठ नहीं पाते है और डॉक्टर तक भी आप किसी का सहारा लेकर जाते है तो खुद़ से वापिस पहले जैसा बनने में मुझे २२ दिनों का अंतराल लगा | जिसमें मेरी सेवा के लिए मित्र शुभम टोपले का कोटिश आभार में दिल से स्वीकार करता हुँ|
यह भी एक रोचक बात है कि मैने अभी तक कभी भी साईकिल नहीं चलाई है पर इस वर्ष गाडी सीखनें में कामयाब रहा हुँ |
हां इस वर्ष एक माह का अज्ञातवास भी मैनें कांटा है , लोगों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराने के लिए एक माह (मई) में परिजनों की दृष्ट्रि से औझल हो गया था |
इस वर्ष हमारी स्वतंत्रता को ७० वर्ष हो गए है तो कुछ संस्थाओं में मुझे अपनी बात रखने का मौका मिला जो कि मेरे लिए काफी गर्व की अनुभूति थी |
हां एक बात जो मुझे अधिक प्रभावित करती है इस वर्ष अग्रस्त माह में दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण में विश्वविद्यालय नहीं गया तो मेरा मेडीकल रीजन भी नज़रअंदाज करते हुए मेरा नाम छात्रों की सूची से गायब कर दिया गया , फिर २० दिन(लगभग) का समय लेकर सितम्बर माह में मैनें १००० रू का चालान भरा तब मैं विश्वविद्यालय का पुन: छात्र बना इन २० + २५ ४५ दिन की मेरी गैरहाजरी रहीं क्योकि २५ दिन में असमर्थ था और २० दिन मैं छात्र ही नहीं था छात्र बनने के ४० (मेरी उपस्थिती ३१ प्रतिशत थी) प्रतिशत उपस्थति नही होने के कारण मुझे परीक्षा में बैठने से वंचित किया गया | आखिरकार आधे घंटे पूर्व एक राजनैतिक ड्रामे के सुखद अंत के रूप मे हमें परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिला | क्योकि 'सत्य प्रताडित हो सकता है पराजित नहीं |' वैसे विश्वविद्यालय में दिए तीनों परिक्षाओं में काफी असमंजस में रहा हुँ पहली परीक्षा (दिसम्बर २०१५)के समय थाने और जेल के चक्कर में तनावग्रस्त था दूसरी परीक्षा (मई२०१६) में लाठी से मार लगने के कारण हाथ सुन्न था और तीसरी परीक्षा के समय (दिसम्बर २०१६) के समय नाम ही वंचित कर दिया गया पर ईश्वर की असीम कृपा और दादी के आशीवार्द और मेरी इच्छाशक्ति नें मुझे राह से भटकने नहीं दिया |
बताने को बहुत सारे किस्से थे पर पूर्व मुख्यमंत्री स्व सुंदरलाल पटवा जी के जन्मदिवस समारोह से बैग गायब हो गया जिसमें मेरी नियमित डायरी थी , शायद कुछ किस्से और उजागर होते जो कि इस वर्ष बडे रोमांचित ढ़ग से मेरे साथ व्यतीत हुए है |
वैसे २०१७ अच्छा वर्ष जाए यही ईश्वर से कामना है वैसे हम तो कर्म में विश्वास जमाए हुए है इस वर्ष एक बड़ी शखिसयत जिन्हे मैं आर्दश मानता हुँ नें मुझे कर्मठता का पर्याय बताया था जो कि मेरे लिए अब तक सबसे ज्यादा प्रसंदीता शब्द बन गया है मैं इस शब्द पर २०१७ में खरा उतरने की पूरी कौशिस करूगा |
शुभकामनाओं सहित
शुभम शर्मा
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