पत्र टु पी.एम

भारत के माननीय प्रधानमंत्री जी
नमस्कार

मैं आप को दूसरा पत्र लिख रहा हुँ, मैनें आपको पहला पत्र नशे की रोकथाम के लिए लिखा था जो आपको प्राप्त हुआ होगा ऐसी मैं आशा करता हुँ खैर मुझे आपका उत्तर प्राप्त नहीं हुआ |

पर भारत के एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते मैं अपने प्रधानमंत्री जी को दुबारा पत्र लिख रहा हुँ इस बार माध्यम डिजीटल है , क्योकि आप डिजीटल इंडिया की चाह रखते है तो मैं भी अपने इस पत्र के माध्यम से अपने विचारो को आप तक पहुँचा रहा हुँ |

पहले तो प्रधानमंत्री जी मैं आपकी लोकप्रियता और सबही आयुवर्ग के लोगो से जुड़ाव के ऊपर एक वाक़या आप को बताना चाहुँगा महोदय आप शौर्य स्मारक के उद्घाटन के लिए भोपाल (म.प्र) आए थे, शहीदो के शौर्य को नमन् करने के लिए बनाए गए इस स्मारक के उद्घाटन में हजारो लोग आपको सुनने आए थे |

मैरी दादी मंगोदेवी शर्मा एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी है जो कि अपने जीवन के ९२ पतछड़ देख चूकी है उन्होने कभी आपका सीधा भाषण नहीं सुना था तो उनको जब पता चला की आप भोपाल भारत के शौर्य को नमन् करने आने वाले है तो उनसे रहा नहीं गया और उन्होने उन अफसरों को फोन घुमाये जो कि ऐसे कार्यक्रमों के आमंत्रण पत्र के लिए जिम्मेदार होते है सबने एक दूसरे की तरफ जिम्मेदारी इंगित करते हुए आखिरकार कार्यक्रम वाली सुबह एक निमंत्रण पत्र घर पर दादी को प्राप्त हो ही गया | फिर प्रारंभ हुई कार्यक्रम स्थल तक जाने की भागदौड़ दादी घर की तीनमंजिला सीढ़ी उतर कर आटो में सवार होकर लाल परेड़ ग्राउड तक पहुंची जहां एकांध टोकमोक के बाद हमारे कर्मठ पुलिस के सिपाहीयों ने दादी की बुजर्ग असमर्थता देखते हुए ऑटो अतिविशिष्ट अतिथी प्रवेश द्वार तक जाने दिया वहां से बैठने की व्यवस्था तक पहुंचनें में और फिर कुर्सी पर बैठाने में बहुत से लोगो ने सहयोग दिया क्योकि एक कांपते हाथों वाली वृद्ध महिला हौसलों से परिपक्व थी पर उम्र की ढ़ाल शरीर असमर्थता बता रहा था , आप मंच पर आए मोदी-मोदी के नारो से पण्डाल गूंज रहा था और लोगों की उम्मीदो भरी आँखे आप के लफ्जों से चहक रही थी पर आप के भाषण और काफिले के जाने तक यानि ७ बजे तक हमें वही रूकना था क्योकि पब्लिक टार्सपोर्ट उससे पहले अंदर अलाउड नहीं था और इतनी भीड़ में मैं दादी को ले जा भी नहीं सकता पर घर वापसी पर आप के भाषण के शब्द टुकडों में मैने बहुत दिनो तक सुने क्योकि आप की प्रशंसक मेरी दादी मुझे बता रही थी कि आपने वहां क्या क्या बोला | बाद मैं वह बोलती की मैं थोडी चलने फिरने लायक हो जाऊ ताकि मैं प्रधानमंत्री का भाषण अगले १५ अग्रस्त को दिल्ली में सुनु ! मोदी जी यह आपकी लोकप्रियता ही है जो कि भारत के करोडो करोड जनमानस आप को दिल में बसाए हुए हैं|

वैसे पत्र में एक दादी द्वारा प्रदत्त विचार में आपको बताना चांहा रहा हुं , आपने नोटबंदी का फैसला जो 8 नवम्बर को लिया उसका सभी जनमानस में सकारात्मक भाव है , उससे जुडे हुए कुछ फैसले जैसे कि वरिष्ठ जनो का जीवित प्रमाण पत्र भरने की तारीख आपने १५ जनवरी कर दी, शादी के लिए २,५० लाख तक भुगतान और जनधन खातो से जुडे हुए फैसलों का व्यापक असर दिख रहा है  परन्तु कुछ जगह जैसे कि मैरा सम्माननिधी खाता बडोदा बैक में है जो कि केन्द्रीय सम्माननिधी की प्राप्ति मुझे उसी से होती है वह जनधन खाते के रूप में खोला गया है जिससे मैं महीनें में १०,००० ही निकाल सकती हुं पर  पैसों का इस उम्र में क्या प्रयोग पर ऐसे कितने लोगो के पेशन या सामान्य खातो को जनधन के अंतर्गत खोला गया होगा यह एक प्रश्नचिन्ह है एक पारदर्शी व्यवस्था के लिए यह आवश्यक है |

               धन्यवाद
          शुभम शर्मा
     Ss103769@gmail.com
(दादी के विचारों को आप तक पहुंचाने का माँध्यम)

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