करो या मरो India quit Movement

आज 9 अग्रस्त है .आज की दिन क्रांति का बिगुल गॉधी जी द्धारा अग्रस्त कांति मैदान में करो या मरो मूलमंत्र द्धारा  भारत की आवाम मैं  अंग्रेजो भारत छोडो उद्रघोष के द्धारा भारतछोडो आंदोलन के तोर पर हुई थी| यह क्रांति यूँ तो अंग्रेजो की दमन नीति के खिलाफ पहली क्रांति नहीं थी पर यह आंदोलन आजादी के पूर्व ब्रिटिश शासन के खिलाफ अंतिम विद्रोह था , इस आंदोलन मैं  एक अनोखा और नवीन नेत्रत्व भी पाया था क्योकि गॉधी जी,जवाहरलाल नेहरू ,सरोजनी नायडु सरीखे नेता बंदी बना लिए गए थे और नेत्रत्व के बिना आंदोलन का रूख कई हिसात्मक न हो जाएँ और आक्रोशित भीड कहीं देश मैं चोरा -चोरी जैसे कई उदाहरण पेश न कर दे यह भी डर पर इस आंदोलन ने भीड़ मैं से ही नेताओ को जन्म दिया अरूणा आसफ़ अली जैसी एक युवती भीड़ मैं से आई और उन्होने तिरंगा पकड़ कर उस भीड़ का नेत्रत्व किया |


                      लाल बहादुर शास्त्री सरीखी  शख्शियत भी इसी समय निखर कर सामने आई जब उनके नेत्रत्व से आंदोलन ने गति पकड़ ली
जयप्रकाश नारायण की प्रसिद्धी भी इसी आंदोलन से हुई जब उनकी नेत्रत्व की शक्ति का परिचायक देश बना...,........
इस आंदोलन की व्यापकता इसी से सिद्ध होती हैं कि 16से 30वर्ष के युवाओं से जेले भर गई थी .
और आंदोलन को रोकने के लिए अंग्रेजो का बड़ा भयावह रूप दिखा जब उन्होने आंदोलन को रोकने के लिए लीठीचार्ज ,गोलीबारी कीऔर ओर क्रातिकारियों को रोकने लिए उनको अनेको यातनाएँ दी गई.....
                             सलाम उस देशभक्ति को उस युवाशक्ति को प्रणाम मेरा बलिदानीयो और बलिदान की भुमि भारत को......

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