आस्था के खातिर जान पर बनी
भारत आस्थावानों का देश हैं ,यहॉ सभ्यता सबसे पहले विकसित हुई शायद यही कारण हैं कि हर तथ्य को लेकर हमारा अलग द्रष्टिकोण हैं |
हम आस्थावान है,ईष्ट की आराधना करने में हमें सन्तुष्ट मिलती हैं ,हम भारतीयों की आस्था का प्रतीक मंदिरों में लगने वाली भीड़ हैं|
हमारे देश भारत में बड़े-बड़े मंदिरों का टर्नओवर करोड़ो में होता हैं, फिर भी हम गरीब हैं और हमारे ही रूपयों का सरकार व मंदिर ट्रस्ट सदुपयोग नहीं करते हैं| मंदिर प्रशासन और सरकार दोनो तो बस नोट गिनने में लगे हैं और तीर्थयात्रीयों की सुरक्षा भगवान भरोसे टिकी हुई हैं|
अभी आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी में गोदावरी नदीं के तट पर पुष्करालू उत्सव में स्नान के लिए आए 27 श्रद्धालुओं की मौत हो गई,इन मौतो का जिम्मेदार कौन हैं ? राज्य प्रशासन ,मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव की सुरक्षा में लगे जवान या वह श्रद्धालु जो कि अपने उद्धार के लिए नदी के तट पर आए थे |
पुलिस प्रशासन की नासमझी व Event Planing के दोष के कारण इतनी जाने गई यह कोई इकलोता मामला नहीं हैं जब कि किसी धार्मिक आयोजन या मंदिरों में भगदड़ से आए दिन कई श्रंद्धालुओं की मृत्यु हो जाती हैं |
दतिया में देवी दर्शन में ,बिहार मैं दशहरे पर,नवरात्र में देवी के मन्दिरों में कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार न होने के कारण आए दिन इतनी जाने जाती हैं और जॉच के नाम पर वो ही ढ़ीला रवैया और नए हादसों का होना आज की सच्चाई हैं जरूरी हैं तो इन कार्यक्रमो की पूर्व तैयारी और जिला प्रशासन की सख्त कार्यवाही जिससे ऐसे हादसे आस्था की बलि न चढ़े|
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