गुरू की महिमा
आज गुरूपूणिमा की बेला पर उन सभी ज्ञात अज्ञात गुरूजनो को प्रणाम जिन्होने मुझे कई सीखे और सब़क सिखाएँ....मेरा मार्गदर्शन किया मुझे बुरे और भले मैं फर्क करना सिखाया .......मॉ से लेकर माध्यमिक शाला ,विघालय और अब विश्वविघालय के उन सभी शिक्षको को मेरा नमन जिनके आशीष ,ज्ञान और प्यार भरी डॉट से मेरा
ज्ञान रूपी नदीं मे प्रवेश हो गया ...............
......धन्यवाद आप सभी गुरूओ का ..........
जब एक गुरू (चाणक्य) अपने सर्वस्व अपने शिष्य को सम्रर्पित करदे तो निश्चित ही वह मगध का अधिपति चन्द्रगुप्त मौर्य के रूप मैं स्थापित हो जाता हैं........
जब गुरू का प्रभाव शिष्य पर पड़ता हैं तो वह निश्चित ही रामकृष्ण परमहंस का शिष्य नरेन्द्र स्वामीविवेकानंद बन जाता है .......
हमारे आराध्यय श्री राम और श्री कृष्ण को भी शिक्षित होने के लिए गुरू वशिष्ठ और गुरू सांदीपनी की आवश्यकता होती है...........
अर्जुन सर्वश्रेष्ठ धर्नुरधर था क्योकि उसके पास गुरू के रूप मैं दोणाचार्य रूपी मार्गदर्शक मौजुद थे .......
बिना शिक्षक के हम बिन बिजली के उपकरण हैं
इसलिए
गुरु ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुदेव महेश्वर:। गुरुसाक्षात्परब्रह्म तस्मैश्री गुरुवे नम:॥
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