भारत की स्वतंत्रता की कीमत
आजादी की कीमत
अंग्रेजी शासन की गुलामी से हम भारतीयो को स्वतंत्रता 15 अग्रस्त 1947 को मिली |इस आजादी के लिए अनेको शख्शियतो ने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया |
ब्रिटिश साम्राज्य की शक्तिशाली व्यवस्था के सामने हमारे देश के आम-जन एकत्रित होकर अपनी क्षमता अनुसार एक देश भारत जिसे यहॉ के निवासी मॉ तुल्य मानते है| उस भारत माता को ब्रिटिश साम्राज्य रूपी जंजीरो से निकालने के लिए उस समय के युवाओं की टोलिया सामने आई |जिन्होने भारत माता की स्वतंत्रता के लिए जान देने से भी पीछे नहीं हटे |
सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तक के सफ़र में बहुत सी माताओं ने अपने पुत्र खोए गोलियों से छल्ली एक क्रांतिकारी की लाश जब उसकी मॉ देखती होगी तो उस पर क्या असर होता होगा इसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं |
आजादी के सिपाही मंगल पाण्डे,तात्या टोपे,झॉसी की रानी लच्क्षमी बाई,बहादुर शाह जफ़र,खुदीराम बोस,सुभाषचंद्र बोस,लाला लाजपत राय,बाल गंगाधर तिलक,विपिन चंद्र पाल,गोपाल कृष्ण गोखले,महात्मा गॉधी,चंद्रशेखर आजाद,सरोजनी नायडु,एनी बेसेन्ट,भगत सिंह,सुखदेव,राजगुरू,अशफाक उल्लाह खॉ, रामप्रसाद बिस्मिल्ल ,पं रविशंकर शुक्ल,जयप्रकाश नारायण,पं जवाहर लाल नेहरू,सरदार बल्लभभाई पटेल,राजेन्द्र प्रसाद,लाल बहादुर शास्त्री सरीखे अनेको सेनानीयो ने भारत की आजादी के लिए हँसते हुए फॉसी के फंदे को चूमते हुए शहीद हो गए |अनेको सेनानी गोलियो व लाठिया खाकर वतनपरस्ती की ख़ातिर शहीद हुए उन शहीदो के खून के एक एक कतरे सींच सींच कर हमे यह आजादी मिली है, लाखो लोग जेल गए ,काले पानी की सजा पाई , आजादी के मतवाले वंदे मातरम कहते गए और पुलिस की यातनाएँ सहते गए |
यह आजादीं हमे थाली मे परोसी हुई नही मिली हैं इस आजादी के बास्ते इस देश की कई पीढ़ीयॉ कुर्बान हुई हैं ,
एक 15 साल का बालक असहयोग आंदोलन में शामिल होने मजिस्टेड़ से दण्ड स्वरूप बेत की मार से कमजोर नहीं पडता बल्कि वह आजाद बनकर मातृभुमि के वास्ते जीवनपर्यन्त संघर्ष करता हैं और वह आजादी का मतवाला चंद्रशेखर आजाद अपने को गोली मारकर मौत को गले लगाता हैं यह है हमारी आजादी के वास्तविक नायक जिन्हे जान से बढ़कर भारत मॉ का मान प्यारा हैं|
"स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार हैं और इसे मैं लेकर रहूँगा" यह अमर वाक्य कहने वाले लोकमान्य बालगंगाधर तिलक का आजादी के लिए जेल यातनाएँ की असहनीय पीड़ा जब वह मधुमेह से पीडित थे और कारावास मैं बंदी थे और उनकी जेल यात्राएँ रोमते खड़े करने वाली है|
"आजान बाहु ऊँची करके
वह बोले रक्त मुझे देना
बदले मैं भारत की आजादी
तुम मुझसे लेना |"
"तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूँगा |"
कहकर युवाओं मैं आजादी का बीज रोपने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस वास्तविकता मैं युवाओं के लिए आर्दश थे उनकी बुद्धिं विवेकानंद जैसी और आजादी के लिए संघर्ष बालगंगाधर तिलक के समान था | वह इन दोनो महान हस्तियो के समिश्रिण थे| देश की स्वतंत्रता के लिए उन्होने अपनी नोकरी छोड़ी ,कल्कत्ता का मेयर पद छोड़ा और लग गए मॉ भारती को स्वतंत्र कराने मे अपना योगदान देने उनकी दूरदर्शिता का ही सबूत हैं कि उन्होने आजाद हिन्द फौज का गठन कर भारत का कुछ हिस्सा अंग्रेजो से स्वतंत्र भी करा लिया था |आजादी के लिए उनका संघर्ष ही था जिससे विश्व जनमत भारत की स्वतंत्रता की तरफ दृष्टिगोचर हुआ|
' कुछ याद उन्हे भी कर लो जो लोट कर घर ना आएँ '
शहीदे ए आजम भगत सिंह जो हँसते हँसते फॉसी पर चढ गए वो भी उस उम्र में जिस उम्र मे युवक अपने भविष्य के सपने बुनते हैं पर भगत सिंह ने भारत माता की आजादी की कसम खाई थी ,इसी लिए उन्होने आजाद भारत की पीढ़ीयो के लिए अपनी देशभक्ति की विरासत छोड़ी है |
ऐसे अनेको क्रातिकारी ,आजादी के सिपाही, वतन के मतवाले हुए जिनकी कुर्बानीयो के कारण मिली आजादी के बूते हम आजाद भारत में अपनी मर्जी के कृत्य कर रहे हैं ; इसलिए उन भारत मॉ के सच्चे सपूतो की पावन भूमि इस देश की स्वतंत्रता को अक्षुण्ण बनाएँ रखे |
"शहीदों की चिताओं पर लगेगे हर वर्ष मेले
वतन पर मिटने वालो का यही बाक़ी निश़ान होगा|"
जय हिन्द
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