अपनी बात

            अपनी बात
 मनुष्य एक सामाजिक प्राणी हैं। समाज में रहकर उसे स्वयं व अन्य व्यक्तियों के लिए  विभिन्न क्रियाएँ करनी पडती हैं। इनमे सबसे प्रमुख क्रियाएँ हैं भावो की अभिव्यक्ति। इस क्रिया को मुख्यता भाषा के माध्यम से सम्पन्न किया जाता हैं।
भाषारुपी सुद्रढ़ स्तम्भों पर ही साहित्यरुपी विशाल भवन खड़ा होता हैं। इसलिए भाषा जितनी सम्रद्ध व सम्पन्न होगी, उनका साहित्यरुपी विशाल व सम्रद्ध व सम्पन्न होगा। 

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