what made gandhi, Gandhi?
महात्मा गांधी की जब भी बात होती है, तो हमें आजादी के वो संघर्ष का दौर याद आ जाता है, जब देश के लाखों लोग एक आवाज के सुनने पर अंग्रेजों की लाठियां, गोलियां खा रहे थे, न्यूयार्क के जार्ज एफ कैनेडी एयरपोर्ट के बाहर निकलते ही करीब चालीस फीट बड़ा पोस्टर लगा है, जिस पर लिखा है, what made gandhi, Gandhi? यह बात उनके जन्म के 150 वे साल में वह देश पूछ रहा है, जो कभी भारत को सिर्फ सपेरों का देश कहता था|
गांधी क्यों दूसरों से अलग थे, यह बात मैनेजमेंट के नजरिए से देखेंगे तो उनके प्रति आदर उनके व्यक्तित्व के विस्तृत पहलू को दिखाएगा| मैंनेजमेंट की एक परिभाषा है, manegment is art of getting think done through and with people. उनका लक्ष्य (gole) मिशन सिर्फ और सिर्फ भारत की आजादी थी, उनका नियोजन (planning) अहिंसा और सत्य की राह पर अडिग था, उन्होने vission (विजन) सत्याग्रह पर टिका हुआ था|
1920 में असहयोग आंदोलन अपने जोरों पर था, लोग उनके आह्वान पर विदेशी कपड़ों की होली जला रहे थे, चरखा को उन्होने एक ब्रांड की तरह इस्तेमाल किया, लोगों को लगा अब आजादी मिल कर ही रहेगी पर चौरा चौरी थाने में आग लगा कर एक बेकाबू भीड़ ने उनकी प्लानिंग को मटियामेट कर दिया और बापु ने तुरंत अपने विजन पर कायम रहकर आंदोलन को वापस ले लिया पर यह उनकी लीडरशिप का ही कमाल था, जो organizing और coordinating की दो टर्म से मिलकर बना है उन्होंने कोई चुनिंदा लोगों को लेकर एक संस्था नहीं चलाई थी, बल्कि एक गरीब और कम पढ़ी लिखी आवादी को एक सूत्र में पिरोकर उन शासकों के खिलाफ खड़ा किया था, जो उनकी तुलना में पढ़ी लिखी और एक सिस्टम का अंग थी, यह नहीं है, कि वह एकदम से सर्वमान्य नेता बनकर उभरे उन्हे जब भारत छोड़ो आंदोलन के समय अगस्त 1942 में जेल में डाल दिए गए थे, तो उनके जेल के होने के बाद भी वह आंदोलन कई युवा नेताओं अरूणा आसफ अली और जयप्रकाश नारायण द्वारा चलाया जा रहा था, उन्होने यह लीडरशिप की एक संस्था के तौर पर एक पूरी पीढ़ी इजाद की थी, जिन्हें गांधीवादी कहा गया, और स्वच्छता और एक टोपी जिसे गांधी टोपी मानकर पहना गया एक प्रतीक के तौर पर इजाद किए|
भारत के त्रिबिध प्रकाश गांधी, विनोबा, जयप्रकाश
जब crises management की रीति नीति की बात की जाती है, तो हमें उनके सिद्धांतों से सीखना चाहिए, जब उनकी आजादी टुकड़ों में बंट कर दो देशों के रूप में मिली, तब वह आज़ादी के जलसे में अपने लक्ष्य के पूरे होने का जश्न नहीं मना रहे थे, बल्कि बंगाल में दंगों में लोगों को समझा रहे थे, विभाजन जैसे crises का जिस प्रकार उन्होंने सामना किया वह भी एक अच्छा उदाहरण है, उन्होने मार्केट टर्म में नए प्रोडक्ट या नए शब्द प्रयोग किए उन्होंने अछुतों को हरिजन कहा, आज भी खादी के ब्रांड एंबेसडर अघोषित तौर पर
महात्मा गांधी ही है|
भारत की आजादी के बाद दुनिया के 111 देश आजाद हुए पर दक्षिण अफ्रीका के नेल्सन मंडेला से लेकर नाइजीरिया के न्येररे तक उनकी मैनेजमेंट की थ्योरी एक कामगर औजार है, जो पूरे देश पर लागू हो सकती है|






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