आइना
*ज़िन्दगी से लम्हे चुरा
*बटुए मे रखता रहा!
*फुरसत से खरचूंगा
*बस यही सोचता रहा।
*उधड़ती रही जेब*
*करता रहा तुरपाई*
*फिसलती रही खुशियाँ*
*करता रहा भरपाई।*
*इक दिन फुरसत पायी*
*सोचा .......*
*खुद को आज रिझाऊं*
*बरसों से जो जोड़े*
*वो लम्हे खर्च आऊं।*
*खोला बटुआ..लम्हे न थे*
*जाने कहाँ रीत गए!*
मैंने तो खर्चे नही
जाने कैसे बीत गए !!
फुरसत मिली थी सोचा
खुद से ही मिल आऊं।
आईने में देखा जो
पहचान ही न पाऊँ।
ध्यान से देखा बालों पे
चांदी सा चढ़ा था,
था तो मुझ जैसा पर
जाने कौन खड़ा था।
- राकेश शर्मा 'दूधवाला'
*बटुए मे रखता रहा!
*फुरसत से खरचूंगा
*बस यही सोचता रहा।
*उधड़ती रही जेब*
*करता रहा तुरपाई*
*फिसलती रही खुशियाँ*
*करता रहा भरपाई।*
*इक दिन फुरसत पायी*
*सोचा .......*
*खुद को आज रिझाऊं*
*बरसों से जो जोड़े*
*वो लम्हे खर्च आऊं।*
*खोला बटुआ..लम्हे न थे*
*जाने कहाँ रीत गए!*
मैंने तो खर्चे नही
जाने कैसे बीत गए !!
फुरसत मिली थी सोचा
खुद से ही मिल आऊं।
आईने में देखा जो
पहचान ही न पाऊँ।
ध्यान से देखा बालों पे
चांदी सा चढ़ा था,
था तो मुझ जैसा पर
जाने कौन खड़ा था।
- राकेश शर्मा 'दूधवाला'

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