कुछ ठोर तो मोहब्बत का बाकी होगा
कुछ ठोर तो मोहब्बत का बाकी होगा.
मेरी तन्हाई में निकला था एक नासूर
एक मासुम ने चूमा, लगा जहां मिल गया.
तुम इश्क हो या कोई खुदा की परी
कभी खुद से कभी जहां से पूछा
बड़ा परेशान था, तुम्हे अपना बनाने में
खुद को खुदा से मिलाने में एक अरसा लगता है
खुदा तो नहीं खुदा के दर पर तुम मिल गई
लगा जज्बातों को कलम मिल गई
बहुत सोचा कैसे संभालूं तुम्हें,
कुछ सीखु या सिखाउं तुम्हे,
बड़ी सिलवटें है इश्क की
खोना, पाना मिलना शख्सियते है इश्क की

बड़ी रूहानी हंसरते है इश्क की
दीदार ए आम में जरूरी है इक खुशी
उस खुशी का सदर है मोहब्बत मेरी
बड़ा कोसा उस दिलतंज आशिक को
रांझा सताया गया अपनी ही सोहबत का
दिल एक कशिश में घरोंदा चाहता है
खुदा का दर नहीं तेरा दिल चाहता है
बहुत डराता है वो मंजर मुझे
जिसमें तुम नहीं सिर्फ तुम्हारी यादें है
फिर ठहर कर अदा ए आशिकी आ ही गई
सोचा पूछ लूं कोई ठोर मोहब्बत का बाकी है?
शुभम शर्मा
मेरी तन्हाई में निकला था एक नासूर
एक मासुम ने चूमा, लगा जहां मिल गया.
तुम इश्क हो या कोई खुदा की परी
कभी खुद से कभी जहां से पूछा
बड़ा परेशान था, तुम्हे अपना बनाने में
खुद को खुदा से मिलाने में एक अरसा लगता है
खुदा तो नहीं खुदा के दर पर तुम मिल गई
लगा जज्बातों को कलम मिल गई
बहुत सोचा कैसे संभालूं तुम्हें,
कुछ सीखु या सिखाउं तुम्हे,
बड़ी सिलवटें है इश्क की
खोना, पाना मिलना शख्सियते है इश्क की

बड़ी रूहानी हंसरते है इश्क की
दीदार ए आम में जरूरी है इक खुशी
उस खुशी का सदर है मोहब्बत मेरी
बड़ा कोसा उस दिलतंज आशिक को
रांझा सताया गया अपनी ही सोहबत का
दिल एक कशिश में घरोंदा चाहता है
खुदा का दर नहीं तेरा दिल चाहता है
बहुत डराता है वो मंजर मुझे
जिसमें तुम नहीं सिर्फ तुम्हारी यादें है
फिर ठहर कर अदा ए आशिकी आ ही गई
सोचा पूछ लूं कोई ठोर मोहब्बत का बाकी है?
शुभम शर्मा
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