स्वच्छता बनी ब्रांड


गांधी जयंती पर संयुक्त राष्ट्र संघ के अधीन आने वाले देशों ने विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाई, वही भारत में स्वच्छता अभियान के 4 वर्ष पूरे होने पर स्वच्छता भारत में एक ब्रांड सरीखा उभरा है, कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वर्धा में झुठे बर्तन मांजने वहीं पूरे देश में तेलगांना के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, बिहार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित हर संस्थान में स्वछंता की अलग जगी है, जब 2 अक्टूबर 2014 में स्वच्छता की बात हुई,




तो आलोचकों ने कहा हम गंदे है, क्या जो सफाई भी हमें सिखानी पड़ेगी, पर सफाई का मतलब सिर्फ खुद की सफाई या घर की सफाई तक सीमित नहीं है, देश की सड़के भी साफ सुधरी हो, हम मॉरीशस की सफाई की बात करें और रोड़ पर गूटखे को खाकर थूके इस स्थिति से अवेयरनेस हमे आ गई है, अब लोग थूकते नहीं है या कचरा नहीं फेकते यह बात नहीं है ।

 पर अब नगर निगम और रहवासी ज्यादा जागरूक हो गए है, सुबह कचरा गाडियां घर के बाहर घूमती है, स्वच्छता सर्वेक्षण सर्वे के लिए ग्रामीण और शहरी इलाकों में जिला प्रशासन ने काफी उत्सुकता देखी गई है, सबसे खास बात जो इससे देश में घटी है वह है खुले में शौच से शहरों को मुक्त करने की, गांवों में शोचालय बनाने के लिए पंचायतों की चुस्ती ने सफाई के लिए हमारी राष्ट्रीय एकता दिखाई है|

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

न्याय की देवी की आंख पर पट्टी क्यों?

मथुरा की लड़की और गोकुल की गाय कर्म फूटे तो अंत ही जाएं (1930 के दशक की कहानी)

यह देख, गगन मुझमें लय है, यह देख, पवन मुझमें लय है,