गौशाला बनाम शिक्षा
हमारे विश्वविद्यालय माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिकता एवं संचार विश्वविद्यालय को लेकर एक खबर पिछले दिनों एक अंग्रेजी समाचार पत्र में प्रकाशित हुई , जोकि विश्वविद्यालय के निर्माणाधीन परिसर बिसनखेड़ी में 5 एकड़ भूमि में गौशाला बनने की थी, जिसको लेकर कुछ व्यक्तियों की पोस्ट से मन निराश हुआ कि आखिर विश्वविद्यालय परिसर में गौशाला बनने से आपत्ति किसे हो सकती है?
विषय का मूल यह है, कि हमारा विश्वविद्यालय बिसनखेड़ी में शिफ्ट होने जा रहा है, जहाँ हमे अनेको सुविधाएँ प्राप्त होगी, ऐसा चकाचोध वाला आश्वासन हमें अक्सर प्राप्त होता है | गौशाला चलाने हेतु इच्छुक संस्थाओं को 'अभिरूचि की अभिव्यक्ति ' विज्ञापन कुलसचिव माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के नाम से समाचार पत्रों के लिए प्रकाशार्थ किया गया था, जिसमें 22 अग्रस्त 2017 तक संस्थाओं को प्रस्ताव कुलसचिव जी को सौपने है, जिसमें गौशाला का रखरखाव व बायो गैंस संयत्र भी प्रस्ताव में अपेक्षित किए गए हैं|
गौर करने वाली बात यह है कि शैक्षणिक संस्थानों में गौशाला मेरी दृष्टि में अच्छा ही कदम है , ऐसी एक गौशाला भारत-भारती बैतुल में भी है , जहाँ पर रहने वाले विद्यार्थी ऐसे वातावरण में हस्त पुष्ट ही हैं|
हमारा विश्वविद्यालय जिन शख्सियत के नाम पर है , भारतीय आत्मा माखनलाल चतुर्वेदी जी ने अंग्रेजी सरकार के स्लाटर हाउस सागर के समीप रतौना में खुलने के विज्ञापन को देखकर, उसके विरोध में कर्मवीर समाचार पत्र में लेख प्रकाशित किया था,उनके पत्रकारिकता के लोहे से एक जन आक्रोश फूटा व वहाँ स्लाटर हाउस की जगह गौशाला का निर्माणा हुआ|
विरोध नकारात्मकता का करे, वि.वि में समस्याएं हो सकती है, उनका निराकरण करे कराएं पर गौशाला जिस दिन भारत के लोगो के लिए समस्या बन गई , उस दिन भारत अपनी आत्मा को खो बैठेगे |
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