अपनों के खोने का ड़र
अंदर से सुकुडता मन देखा है
मैने अपनो के खोने का ड़र देखा हैं|
रूह भी कंप जाती है वो पल सोचकर
जब साथ नहीं होगी वो क्षण सोचकर
भरी दुनिया में अकेला होने का ड़र है
किसी अपने का साथ छुटने का ड़र है
माना यह तो कुदरत का असूल है ,
जो आया है उसको जाना जरूर है |
मौत
समर्पित अम्मा मंगो देवी शर्मा
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें