विष का प्याला

मैं विष का प्याला पीता हुँ
मैं नीलकंठ , मैं अविनाशी
मेरे रग रग में ब्रह्माण्ड वसा
जीवन , मृत्यु है, एक छटा
मैं भस्म लगाएं फिरका हुँ
भवसागर में नहीं घिरता हुँ|

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