हमारे बुजर्ग
मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना को 5 वर्ष पूर्ण होने पर मध्यप्रदेश सरकार व मुख्यमंत्री जी को बधाई , हमारे आस -पास अक्सर वृद्धजन पैसे मांगते मिल जाते है, कुछ लोग संवेदनावश कुछ रूपए दे देते है, तो कुछ चाय पिला कर या समोसा खिलाकर खुद को संतुष्ट कर लेते है, वही कुछ लोग उन्हे दुत्कार भी देते हैं| पर कभी आप उन बुजर्गो को समझिए , उनकी स्वयं की व्यथा कि वह खुद क्यो पैसे मांगने को मजबुर हुए हैं , कोई बुजर्ग महिला अपनी बहन के बुलावे पर बाड़ी बरैली से भोपाल के आनंदनगर में रहने आ जाती है, और बहन की मौत के बाद भोपाल की गलियों में लोगो का सहारा ढुढ़ती हैं| कोई महिला स्वयं के बच्चों के व्यवहार से त्रस्त होकर 75वर्ष की आयु में फुटपाथ पर सोने को मजबुर हैं| क्योकि यह हमारे समाज की व्यथा है, कि हम 4साल के बच्चे के बिस्तर गीला करने पर खुश होते हैं, और अपने स्वयं के माँ बाप के बिस्तर गीला करने पर उन्हे कोसते हैं| बच्चा बाथरूम में फिसल जाए तो हाय तौबा करते हुए डॉकटर व हॉस्पीटल का दरवाजा खटखटाटे है और बुढ़ी माँ के फिसलने पर कहते है, कि वह नाटक कर रही हैं | यह सच्चाई है, परिवार नाम की संस्था कि जो हर दूसरे तीसरे घर में हमारे बुजर्ग भुगत रहे हैं| पता नहीं हम यह क्यों भूल जाते हैं, कि बुढ़ापा हमारा भी आएगा और हम अपने बच्चों को जाने क्या नैतिकता सीखा रहे हैं| आज हमारे घर में बच्चा अपने बाबा की भाषा नहीं समझ पाता हैं , माना वह फराटेदार इंग्लिश बोललेता है, पर बाबा- दादी की कहानियों से वह कोसो दूर हो गया हैं|
हमने भी कहानियों में सुना था कि त्रेतायुग में एक श्रवणकुमार नाम का पुत्र भी हुआ था, जिसने अपने अंधे माता -पिता को कांवण में बिठा कर तीर्थदर्शन कराए थे| शायद आज के दौर में पिता को कारावास में बंद करते कष्य दिख जाते है, पर माता -पिता को तीर्थकराते श्रवणकुमार नहीं|
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी की मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना का लाभ उठाकर जो बुर्जग चारोधाम व अन्य तीर्थ स्वर्ण मन्दिर , हाजी अली दरगाह आदि का तीर्थ लाभ लेकर आए हैं, उनकी दुआएं , आर्शीवाद 5 वर्षो से मध्यप्रदेश सरकार को मिल रहा है, हमारे संवेदनशील मुख्यमंत्री जी की बुजर्गो के प्रति संवेदना और सम्मान भाव से सब परिचित हैं, आपकी यह योजना निश्चित ही हमारे समाज में अन्य श्रवणकुमारों को प्रेरणा देगी जिससे हमारे बुर्जग फुटपाथो व वृद्धाश्रमों की जगह अपने घर पर नाती पोतो को पंचतत्र की कहानी सुनाते हुए मिले |
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