सोशल मीडिया की लत
सोशल मीडिया पर सक्रियता अब अनिवार्य हो गई है आप कही पर भी चले जाओं आप को अधिकतर युवा साथी फेसबुक ,Whats app चलाते मिल जाइगे और इस आभासी सोशल मीडिया की दुनिया की बाते ही हर जगह विद्यमान है , मैं मानता हुँ सोशल मीडिया ने हमारा जनसम्पर्क बढ़ाया है पर हमारे बीच की आत्मीयता कम कर दी है | हमारे पास फेसबुक पर अन्जान लोगों से बात करने के लिए तो पर्याप्त मात्रा में समय है पर अपने घर के लोगो से बात करने का समय नहीं हैं अब बच्चे गर्मीयों की छुट्टी में नानी के घर नहीं जाते ,क्योकि बच्चे अपने परिजनों से बात करनें मे तो शर्मातें है पर फेसबुक पर स्टेटस in a open Relationship डालनें में नहीं , हमारे विचार इसलिए इतने सम्पन्न नहीं हैं क्योकि हमारे एकांत में भी हमारे साथ हमारा स्मार्ट फोन होता है और उसमें बैठे अनेको एप्स जो कि हमारे मनोरंजन के साथ-साथ हमारा समय भी खराब करते हैं | गूगल के दौर में हम किताबों पर निर्भर नहीं हैं इसलिए हमारा बौद्धिक विकास नहीं हो पा रहा है अभी अगर चार पुराने मित्र मिलते है तो उनमें से दो तो इस आभासी दुनिया में ही मशगुल हो जाइगे हमारी रातो की नीदे इस आभासी दुनिया की चमक में खो गई है सोशल मीडिया की लत में युवापीढ़ी ग्रस्त है और उसकी भेट हमारे संबंध चढ़ रहे हैं आज आठवी का बच्चा एक स्मार्टफोन की मांग करता है और उसके घरवाले यह कहकर उसे यह जादू का पिटारा दे देते है कि बच्चा बडा हो गया| पश्चिम में जाकर तो सूरज भी डूब जाता है और हम इस पश्चिम की देन दुनिया में रहकर अपने आर्दशों को बली दे रहे हैं जो भी हो शुरूआत स्वयं से करनी चाहिए और अब से में इस आभासी दुनिया में सिर्फ एक घंटे ही समय खराब करूँगा | रात्री 7 से 8 बजे तक, क्योकि जीवन बडा अनमोल है और यह वास्तविक दुनिया के लिए ही जीया जाना चाहिए |
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