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अगस्त, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ABVP World's Largest Student Organisation

आज मैं आपको अखिल भारतीय विघार्थी परिषद (ABVP) के बारे मे अवगत कराता हुँ | अखिल भारतीय विघार्थी परिषद ABVP  विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन हैं जो कि 9 जुलाई 1949 से लगातार छात्रहित में कार...

आस्था के खातिर जान पर बनी

भारत आस्थावानों  का देश हैं ,यहॉ सभ्यता सबसे पहले विकसित हुई शायद यही कारण हैं कि हर तथ्य को लेकर हमारा अलग द्रष्टिकोण  हैं | हम आस्थावान है,ईष्ट की आराधना करने में हमें सन्...

भारत की स्वतंत्रता की कीमत

            आजादी की कीमत अंग्रेजी शासन की गुलामी से हम भारतीयो को स्वतंत्रता 15 अग्रस्त 1947 को मिली |इस आजादी के लिए अनेको शख्शियतो ने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया |           ...

करो या मरो India quit Movement

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आज 9 अग्रस्त है .आज की दिन क्रांति का बिगुल गॉधी जी द्धारा अग्रस्त कांति मैदान में करो या मरो मूलमंत्र द्धारा  भारत की आवाम मैं  अंग्रेजो भारत छोडो उद्रघोष के द्धारा भारतछोडो आंदोलन के तोर पर हुई थी| यह क्रांति यूँ तो अंग्रेजो की दमन नीति के खिलाफ पहली क्रांति नहीं थी पर यह आंदोलन आजादी के पूर्व ब्रिटिश शासन के खिलाफ अंतिम विद्रोह था , इस आंदोलन मैं  एक अनोखा और नवीन नेत्रत्व भी पाया था क्योकि गॉधी जी,जवाहरलाल नेहरू ,सरोजनी नायडु सरीखे नेता बंदी बना लिए गए थे और नेत्रत्व के बिना आंदोलन का रूख कई हिसात्मक न हो जाएँ और आक्रोशित भीड कहीं देश मैं चोरा -चोरी जैसे कई उदाहरण पेश न कर दे यह भी डर पर इस आंदोलन ने भीड़ मैं से ही नेताओ को जन्म दिया अरूणा आसफ़ अली जैसी एक युवती भीड़ मैं से आई और उन्होने तिरंगा पकड़ कर उस भीड़ का नेत्रत्व किया |                       लाल बहादुर शास्त्री सरीखी  शख्शियत भी इसी समय निखर कर सामने आई जब उनके नेत्रत्व से आंदोलन ने गति पकड़ ...

होसला बुलंद

ङर मुझे भी लगा फाँसला देखकर पर मै बढ़ँता गया रास्ता देखकर खुद-ब-खुद मेरे नजदीक आती गई मेरी मजिल मेरा होसला देखकर

किसी के सच्चे हमदर्द बनो

ऑखो से ऑसू भी नहीं निकलते और रोना भी है ....मन करता है खुलकर रो जैसे बचपन मैं छोटी सी बात पर खूब रोते थे .... पर यह दिमाग हमे रोने नहीं देते यह दिमाग ही हमे बतलाता है कि हम बड़े हो गए है र...

किसी के सच्चे हमदर्द बनो

ऑखो से ऑसू भी नहीं निकलते और रोना भी है ....मन करता है खुलकर रो जैसे बचपन मैं छोटी सी बात पर खूब रोते थे .... पर यह दिमाग हमे रोने नहीं देते यह दिमाग ही हमे बतलाता है कि हम बड़े हो गए है र...

सीख

दुयोधन के मरते समय अंतिम शब्द थे कि मै अपने साथ वीर योद्धा (भीष्म पितामह ़ दोणाचाय ़ कर्ण ़अभिमन्यु ) ले कर जा रहा हुँ अब ( पाण्डव ) तुम अहसायो और बीमारो के साथ राज्य करो ़ कभी कभी ...

व्यापमं का भयावह रूप

व्यापमं घोटाला दिन व दिन लोगो की बलि लिए जा रहा है इतने लोगो की मौत जो की एक ही मामले के आरोपी या जुडे हुए थे इतनी मौते अचानक होना किसी न किसी सडयत्र की और इशारा करता है अभी आजव...

देश के कलाम

वो भी क्या शख्स था जो इन्सानियत की मिसाल था, खुदा का एक कलाम था, कमाल था....!!! भारत के पूर्व राष्ट्रपति ,भारत के मिसाइल मैन ,भारत रत्न डॉ.ए.पी.जे अब्दुल कलाम (अबूल पाकिर जैनुल्लाब्दी...

गुरू की महिमा

आज गुरूपूणिमा की बेला पर उन सभी ज्ञात अज्ञात गुरूजनो को प्रणाम जिन्होने मुझे कई सीखे और सब़क सिखाएँ....मेरा मार्गदर्शन किया मुझे बुरे और भले मैं फर्क करना सिखाया .......मॉ से लेकर...

अपनी बात

            अपनी बात   मनुष्य एक सामाजिक प्राणी हैं। समाज में रहकर उसे स्वयं व अन्य व्यक्तियों के लिए  विभिन्न क्रियाएँ करनी पडती हैं। इनमे सबसे प्रमुख क्रियाएँ हैं भावो की अभिव्यक्ति। इस क्रिया को मुख्यता भाषा के माध्यम से सम्पन्न किया जाता हैं। भाषारुपी सुद्रढ़ स्तम्भों पर ही साहित्यरुपी विशाल भवन खड़ा होता हैं। इसलिए भाषा जितनी सम्रद्ध व सम्पन्न होगी, उनका साहित्यरुपी विशाल व सम्रद्ध व सम्पन्न होगा।