संदेश

अक्टूबर, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

लव का देवता कामदेव

चित्र
प्यार में  लोग  अक्सर धोखा इसीलिए खाते है, क्योंकि प्यार के देवता (कामदेव) के हाथ में धनुष है और न्याय की देवी की आंख में पट्टी बंधी है, हम प्यार को अंधा कहते है, पर देख तो न्याय की देवी नहीं सकती है| तराजू यदि प्यार को तोलता तो ज्यादा कामगर होता पर वह न्याय का मापक है।  जिसके हाथ में धनुष है, वह तो आखिरकार मारने का ही काम  करेगा बस इसी धारणा से सारी प्रसिद्ध प्रेम कथाओं का अंत दुखद ही है| पंजाब की एक प्रसिद्ध प्रेम कहानी जो बाबा वारिसशाह ने 1767 ई. में गढ़ी थी, जिसे सुन एक रांझो की जमात पंजाब में कायम हो गई वह भी आखिरकार एक तड़पन की व्यथा थी। जब 1965 में आर के नारायण के अंग्रेजी उपन्यास द गाइड पर देव आनंद और वहीदा रहमान के अभिनय से सजी मूवी तैयार हुई तो जनता को शादी के बाद पत्नी के दूसरे पुरूष से संबंध पर ऐतराज था, लोगों को यह तबके भारत की कहानी नहीं लगी पर मूवी में भी देवानंद के पात्र राजू की जबरन उपवास से बारहवें दिन मौत हो जाती है, यह भी अचरज है कि उसके प्यार से समाज निकाला, जेल और संत वेशभूषा में मौत तक की कहानी प्रेम को अमर दिखाती है पर प्रेम व...

कुछ ठोर तो मोहब्बत का बाकी होगा

चित्र
कुछ ठोर तो मोहब्बत का बाकी होगा. मेरी तन्हाई में निकला था एक नासूर एक मासुम ने चूमा, लगा जहां मिल गया. तुम इश्क हो या कोई खुदा की परी कभी खुद से कभी जहां से पूछा बड़ा परेशान था, तुम्हे अपना बनाने में खुद को खुदा से मिलाने में एक अरसा लगता है खुदा तो नहीं खुदा के दर पर तुम मिल गई लगा जज्बातों को कलम मिल गई बहुत सोचा कैसे संभालूं तुम्हें, कुछ सीखु या सिखाउं तुम्हे, बड़ी सिलवटें है इश्क की खोना, पाना मिलना शख्सियते है इश्क की बड़ी रूहानी हंसरते है इश्क की दीदार ए आम में जरूरी है इक खुशी उस खुशी का सदर है मोहब्बत मेरी बड़ा कोसा उस दिलतंज आशिक को रांझा सताया गया अपनी ही सोहबत का दिल एक कशिश में घरोंदा चाहता है खुदा का दर नहीं तेरा दिल चाहता है बहुत डराता है वो मंजर मुझे जिसमें तुम नहीं सिर्फ तुम्हारी यादें है फिर ठहर कर अदा ए आशिकी आ ही गई सोचा पूछ लूं कोई ठोर मोहब्बत का बाकी है? शुभम शर्मा

बरसी या वर्षगाठ

चित्र
मुझे नहीं पता मुझे चलना किसने सिखाया पर मुझे लड़ना मेरी अम्मा ने ही सिखाया था. यूं तो ठीक एक वर्ष पहले 10 अक्टूबर को वह मुझे छोड़ गई पर आज भी यदि सपने मैं उनकी छलक दिखती है, तो मेरे दिन की शुरुआत रोने से होती है, मेरे पर्स में दो फोटो है, एक सिंखों के गुरु गोविंद सिंह की और दूसरी अम्मा मंगों देवी शर्मा की, याददाश्तन दो हफ्ते पुरानी बात है, जब उनकी फोटो में मुंह वाला हिस्सा संयोगवश बिगड़ गया था और मैं खूब रोया, क्योकि अम्मा दमा की मरीज थी और अक्सर उन्हे सांस लेने में दिक्कत होती थी उनकी हर स्वास्थ्य संबंधी समस्या से मुझे दो चार होना ही पड़ता था  और मुझे घबराते देख वो बोलती थी, कि ‘ चित्ता मत कर मैं अभी नहीं मर रही ’ पर उनका यह वादा एक दिन टूट ही गया और वह अब नहीं है, मुझे वो अक्सर समझाती थी, कि बेटा जब मैं मरु तो यह यह करना, इतने लोटे, इतने ब्लाउज, इतनी मट्ठरी बनवा लेना, उन्होने यह भी बताया हुआ था, कि जब जाउं तो इन इन को फोन लगा देना, जिनमें एक दादी की ननद थी और एक दादी की भतीजी, एक उनके स्वतंत्रता सेनानी साथी थे, जिनके नंबर उन्होने खुद से एक कागज में लिखकर दे र...

आइना

चित्र
*ज़िन्दगी से लम्हे चुरा  *बटुए मे रखता रहा! *फुरसत से खरचूंगा *बस यही सोचता रहा। *उधड़ती रही जेब* *करता रहा तुरपाई* *फिसलती रही खुशियाँ* *करता रहा भरपाई।* *इक दिन फुरसत पायी* *सोचा .......* *खुद को आज रिझाऊं* *बरसों से जो जोड़े* *वो लम्हे खर्च आऊं।* *खोला बटुआ..लम्हे न थे* *जाने कहाँ रीत गए!* मैंने तो खर्चे नही जाने कैसे बीत गए !!  फुरसत मिली थी सोचा  खुद से ही मिल आऊं। आईने में देखा जो पहचान  ही न पाऊँ। ध्यान से देखा बालों पे चांदी सा चढ़ा था, था तो मुझ जैसा पर जाने कौन खड़ा था।                             - राकेश शर्मा 'दूधवाला'

दिव्यांग मतदाता, सशक्त मतदान जिससे बने लोकतंत्र महान

चित्र
दिव्यांग मतदाता, सशक्त मतदान जिससे बने लोकतंत्र महान मतदान लोकतंत्र का महापर्व है, जिसमें हमारे बहुमूल्य वोट की अपनी अहमियत है, अपने मताधिकार का प्रयोग कर अपने जनप्रतिनिधी को चुनिए. "दिव्यांग मतदाता, सशक्त मतदाता" नरसिंहपुर जिला प्रशासन का लक्ष्य है, कि जिले में शत प्रतिशत मतदान का प्रयोग मतदाता करे. इसके लिए पीडब्ल्यूडी दिव्यांग मतदाता अपने मत का प्रयोग करे यह बहुत जरूरी है, इसके लिए जिले के सभी एक हजार 12 मतदान केंद्रों को आदर्श मतदान केंद्र बनाया जा रहे है, जहां दिव्यांग मतदाताओं के लिए व्हील चेयर की व्यवस्था रहेगी, जिससे उन्हें वोट देने में परेशानी न हो, उन्हे साइन लैंग्वेज में आमंत्रण पत्र भी भेजे जा रहे है, ताकि वह इसमें हिस्सेदारी से, इस पहल से दिव्यांगों में उत्साह देखा जा रहा है, उन्होने जागरूकता रैली में शामिल होकर सभी निशक्तजनों को वोट देने के लिए जागरूक किया है.  मतदान केंद्रों में सहज और सुगम वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है, उन्हें वोट देने के लिए लाइन में लगने की भी जरूरत नहीं है, 4 स्वयंसेवी बूथदूत के रूप में मतदान केंद्रों पर तैनात रहेंगे, ...

स्वच्छता बनी ब्रांड

चित्र
गांधी जयंती पर संयुक्त राष्ट्र संघ के अधीन आने वाले देशों ने विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाई, वही भारत में स्वच्छता अभियान के 4 वर्ष पूरे होने पर स्वच्छता भारत में एक ब्रांड सरीखा उभरा है, कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वर्धा में झुठे बर्तन मांजने वहीं पूरे देश में तेलगांना के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, बिहार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित हर संस्थान में स्वछंता की अलग जगी है, जब 2 अक्टूबर 2014 में स्वच्छता की बात हुई, तो आलोचकों ने कहा हम गंदे है, क्या जो सफाई भी हमें सिखानी पड़ेगी, पर सफाई का मतलब सिर्फ खुद की सफाई या घर की सफाई तक सीमित नहीं है, देश की सड़के भी साफ सुधरी हो, हम मॉरीशस की सफाई की बात करें और रोड़ पर गूटखे को खाकर थूके इस स्थिति से अवेयरनेस हमे आ गई है, अब लोग थूकते नहीं है या कचरा नहीं फेकते यह बात नहीं है ।  पर अब नगर निगम और रहवासी ज्यादा जागरूक हो गए है, सुबह कचरा गाडियां घर के बाहर घूमती है, स्वच्छता सर्वेक्षण सर्वे के लिए ग्रामीण और शहरी इलाकों में जिला प्रशासन ने काफी उत्सुकता देखी गई है, सबसे खास बात...

what made gandhi, Gandhi?

चित्र
महात्मा गांधी की जब भी बात होती है, तो हमें आजादी के वो संघर्ष का दौर याद आ जाता है, जब देश के लाखों लोग एक आवाज के सुनने पर अंग्रेजों की लाठियां, गोलियां खा रहे थे,  न्यूयार्क के जार्ज एफ कैनेडी एयरपोर्ट के  बाहर निकलते ही करीब चालीस फीट बड़ा पोस्टर लगा है, जिस पर लिखा है, what made gandhi, Gandhi? यह बात उनके जन्म के 150 वे साल में वह देश पूछ रहा है, जो कभी भारत को सिर्फ सपेरों का देश कहता था| गांधी क्यों दूसरों से अलग थे, यह बात मैनेजमेंट के नजरिए से देखेंगे तो उनके प्रति आदर उनके व्यक्तित्व के विस्तृत पहलू को दिखाएगा| मैंनेजमेंट की एक परिभाषा है, manegment is art of getting think done through and with people. उनका लक्ष्य (gole) मिशन सिर्फ और सिर्फ भारत की आजादी थी, उनका नियोजन (planning) अहिंसा और सत्य की राह पर अडिग था, उन्होने vission (विजन) सत्याग्रह पर टिका हुआ था|  1920 में असहयोग आंदोलन अपने जोरों पर था, लोग उनके आह्वान पर विदेशी कपड़ों की होली जला रहे थे, चरखा को उन्होने एक ब्रांड की तरह इस्तेमाल किया, लोगों को लगा अब आजादी मिल कर ही रहेगी प...

राहुल गांधी चोर है

चित्र
माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय में कल एक प्रदर्शन हुआ, जो कि अधिकारिक तौर पर एनएसयूआई ( कांग्रेस की छात्र इकाई) का प्रदर्शन था, जिसका मुद्दा कुलपति के द्वारा ट्वीटर पर राहुल गांधी चोर है ट्वीट को रीट्वीट करने से जुड़ा हुआ था. सोशल मीडिया पर विचार की लड़ाई जमीनी लड़ाई में तब्दील होती यहां दिखी. गौरतलब है, कि यहां कुलपति के समर्थन में छात्रों ने भी नारेबाजी की,  जो कि उनकी कम समय में लोकप्रियता दिखाती है, पर फिर भी छात्रों का जोश अलीगढ़ विश्वविद्यालय और जेएनयू जैसा दिखा, जिसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू है, नारेबाजी अक्सर तनाव को कम करती है, जब आप किसी व्यवस्था की खिलाफत में नारेबाजी करते है, तो हम बताते है, कि  हम व्यवस्था के कितने शिकार है, और सच मानिए जब आप भारत माता की जय, मातरम मातरम वंदे मातरम, शिक्षा के दलालों को जूते मारो सालों को जैसे नारे लगाते है, तो आपके चिल्लाने से निकले नारे से आपकी पीड़ा नारों की शक्ल में बाहर निकल जाती है. एक भोपाल से स्वतंत्रता सेनानी थे, पंडित रविशंकर भारतीय नाम था दादा का( अभी दिवंगत है) उन्हे अंग्रेजी जेल में इसीलिए बंद किया ग...