रायसीना हिल्स में राजेंद्र प्रसाद के पहले रहे नेता की कहानी (94 वर्ष की उम्र के तीन ट्रेंड सेंटर नेता)


94 वर्ष के दो नेता पेरियार और राजगोपालाचारी

तमिलनाडु की सत्ता का पांच बार स्वाद चख चूके करूणानिधि का निधन जब 7 अगस्त 2018 को हुआ तो एक दफा फिर से दक्षिण की राजनीति के लिए लुटियन्स हिल्स के प्रशंसकों की दिलचस्पी जगी कि किस प्रकार 94 वर्ष तक एक द्रविड नेता पूरे राज्य का दुलारा बना रहा, जब वह 2016 में थिरूवरूर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए तो तमिलनाडु में रिकॉर्ड वोटो से जीते थे, यह भी संयोग है कि तमिलनाडु के तीन ट्रेड सेंटर मुत्तुवेल करुणानिधि ( जन्म 3 जून 1924 - मृत्यु 7 अगस्त 2018), इ. वी रामास्वामी पेरियार (जन्म 17 सितंबर 1879 - मृत्यु 24 दिसंबर 1973) और चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (जन्म 10 दिसंबर 1878 - मृत्यु 25 दिसंबर 1972)
तीनों का ही निधन 94 वर्ष की उम्र में हुआ था और तीनों ने सिर्फ तमिलनाडु की ही नहीं बल्कि देश की राजनीति में क्रांतिकारी बदलाव किए है, तीनों की दूरदर्शिता, सोच और संघर्ष का लोहा पूरे देश ने माना है|


                  94 वर्ष के ट्रेंड सेंटर नेता करूणानिधि

भारत जब आर्यावर्त के नाम से जाना जाता था, तब आज के दक्षिण भारतीय राज्यों को दक्षिणावर्त कहा जाता था, यूं तो आदि शंकराचार्य से लेकर ए.पी.जे अब्दुल कलाम तक इसी क्षेत्र से आते है पर आज भी इस क्षेत्र की राजनीति टेलिविजन स्क्रीन और हिंदी भाषी अखबारों में जब नजर आती है, तो नजारे यू होते है जब अन्ना द्रमुक प्रमुख जयललिता अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार से समर्थन वापस ले लेती है और देश की भाजपानीत एनडीए की सरकार गिर जाती है, या फिर जयललिता की मौत और अभी हालही में करूणानिधि की मौत खबरों में आई थी, इन अंचलों की खबरें तभी प्रमुखता पाती है, जब इन राज्यों के नेताओं का निधन होता है, या फिर आपदा का प्रकोप घटता है या फिर चुनाव में यहां कि सरकारें बनने वाली होती है|

                      पहले भारतीय गवर्नर जनरल राजाजी
 
दक्षिण का दखल
यदि जननेता पोट्टी श्रीरामलू तेलगु लोगों के हितों की रक्षा के लिए आमरण अनशन पर नहीं बैठते तो 1 नबंवर 1956 को गठित आंध्रप्रदेश और देश का नक्शा भाषाई आधार पर न होता, कांग्रेस सिंडिकेट नेता और तीन बार कांग्रेस सुप्रीमो रहे के कामराज ने दो-दो प्रधानमंत्री के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, उनके समर्थन से ही लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी देश के प्रधानमंत्री बन पाए, पर दक्षिण और खासतौर पर तमिलनाडु के तीन नेता जो 94 वर्ष की उम्र में देह त्यागे थे, उनके तार आपस में जुड़े हुए हैं अगर वह तीन  क्रांतिकारी नेता जो देश की राजनीति में ट्रेड सेंटर रहे है|

                             सी राजगोपालाचारी

पहले ट्रेंड सेंटर नेता है चक्रवर्ती राजगोपालाचारी यदि 1937 में वह मद्रास प्रांत के मुख्यमंत्री के नाते वहां के स्कूलों में हिंदी को अनिवार्य नहीं करते तो शायद द्रविड़ आंदोलन कि नींव वहां पड़ती ही नहीं और करुणानिधि जैसे नवयुवक स्कूली दिनों में 14 वर्ष की आयु में तमिल अस्मिता की बात नहीं करते, राजगोपालाचारी को प्यार से राजाजी कहा जाता था वह महात्मा गांधी के समधी थे उनकी बेटी लक्ष्मी की शादी गांधीजी के बेटे देवदास गांधी से हुई थी, इसके बावजूद वह गांधीजी का विरोध करने से नहीं चुके जब द्वितीय विश्व युद्ध में कांग्रेसी नेता ब्रिटेन का साथ दे रहे तो राजाजी का कहना था, कि पूर्ण स्वराज की शर्त पर ही हमें ब्रिटेन का सपोर्ट करना चाहिए और वह गांधीजी के फैसले के खिलाफ जाकर कांग्रेस से इस्तीफा दे दिए, वह दूर की सोच रखने वाले एक नेता थे, जब पेरियार सामाजिक सुधार की बात कर रहे थे तो वह उन्हें कांग्रेस में ले आए|
                 महात्मा गांधी और उनके समधी राजाजी

 राजाजी ने 1942 में ही कांग्रेस के इलाहाबाद अधिवेशन में दो देश के प्रस्ताव को स्वीकार करने की बात की थी, तब उनका विरोध किया गया था पर उस दूरदर्शी नेता ने पहले ही स्वतंत्रता और विभाजन  के भविष्य को देख लिया था, देश स्वतंत्र हुआ तो पंजाब और बंगाल में हिंसा भड़कने लगी ऐसी स्थिति में राजाजी दस महीने बंगाल के राज्यपाल रहे जब माउंटबेटन गवर्नर जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए तो भारत के सबसे बड़े पद पर पहली और आखिरी बार बैठने वाले भारतीय वह ही थ. उन्होने 21 जून 1948 से संबिधान लागू होने तक (26 जनवरी 1950) इस पद पर रहे, जब राजेंद्र प्रसाद संबिधान सभा की अध्यक्षता कर रहे थे, राजाजी रायसीना हिल्स से देश की बागडोर संभाल रहे थे, जवाहरलाल नेहरू चाहते थे कि राजाजी ही देश के पहले राष्ट्रपति बने पर इस पद पर सरदार पटेल की प्रसंद से राजेंद्र बाबू ही बैठे, 1952 में पुनः उन्हें मद्रास के मुख्यमंत्री का पद दिया गया, राजाजी तो वैसे कभी राष्ट्रपति नहीं बन पाए पर उनकी सरकार में श्रम एवं उद्योग मंत्री रहे वी वी गिरी जरुर देश के राष्ट्रपति बने, राजाजी 10 महीने के लिए सरदार पटेल की मौत के बाद देश के गृहमंत्री रहे उसके पहले वह बिना मंत्रालय के केबीनेट मंत्री थे|
          जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और राजाजी

1954 में जब भारत रत्न के रूप में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान की योजना बनी तो इस सम्मान का मान बढ़ाने वाले पहले व्यक्ति भी सी राजागोपालचारी ही थे, खेर उन्होने कांग्रेस छोड़ स्वतंत्र पार्टी बना ली वह नेहरू की नीतियों के प्रखर आलोचक बन गए, जब जम्मू कश्मीर के नेता शेख अब्दुल्ला असमंजस में थे कि कश्मीर का निराकरण कैसे करे तो दक्षिण के इस नेता ने देश के उत्तरी शिखर की समस्या का समाधान उन्हे बताया वह बुजुर्ग नेता की सलाह को लेकर प्रधानमंत्री नेहरू के पास गए और प्रधानमंत्री के अधिकारिक निवास तीनमूर्ति भवन में कुछ दिन रूके भी नेहरू से मशविरा कर वह पाकिस्तान चले गए पर 26 मई 1964 को नेहरू के निधन के बाद ही राजाजी का  कश्मीर मंत्र न कारगर साबित हो पाया न पब्लिक डोमेन में उसका खुलासा हो पाया, यह 25 दिसंबर 1972 को  94 साल की आयु में देह सिधार गए|




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