बेहद पसंद हो तुम, उस चांद को...
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बेहद पसंद हो तुम,
उस चांद को...
तुम्हे देखने वह रात में आता है
खोई रहती हो तुम, सपनो में अपने
कभी सोचा है तुमने वह क्या बात है
आंखों में वसा हर जज़्बात है
रूप सुंदर है तो क्या किसे है खबर
हम तो अंदाज में तुम्हारे, जा दे बैठे
दिल्लगी चीज क्या सोचा ही नहीं
हम तो ख्यावो में तुमको है पा चुके
बेहद पसंद हो तुम,
उस चांद को...
देखा था तुम्हे तो पता न चला
छुआ जब मुझे तो, मैं खो ही गया
कुछ जादुई एहसास मैने पा लिया
तुमको हकीकत में तो नहीं,
इस दिल में बसा लिया
धड़कने पास आकर बढ सी गई
उनको भी लगा पक्षी आ गया
बेहद पसंद हो तुम,
उस चांद को...
पक्षी उडते तो है उस आकाश में
पर धरती पर आकर खो ही गए
घोंसला उनका टहनियों पर वसा
शितम खूब किया हवा ने मगर
पंछियों को डराना न आसान है
वह उड़े अपने आशिक से मुलाकात को
हवा पर सवार उनकी उडान थी
बेहद पसंद हो तुम,
उस चांद को...

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