पहला लेख :- दैनिक जनसत्ता
भारत के नेपाल से बदलते रिश्तो के मायने :-
भारत और नेपाल पड़ोसी देश है दोनो देशो का रिश्ता ऐतिहासिक है पर नेपाल को भारत ने ऐसा नजरअंदाज कर दिया कि 17 वर्षो तक भारत का प्रधानमंत्री नेपाल नहीं गया था | यही कारण था कि नेपाल पर चीन ने अपना आधिपत्य स्थापित करने का सफल प्रयास किया और नेपाल में डैगन पैर पसारता गया | पिछले वर्ष भारत के प्रधानमंत्री की नेपाल यात्रा और नेपाल भूकम्प त्रासदी में भारत की मदद ने दोनो देशों के सुधरते रिश्तों कीऔर ललक जगाई थी पर अब नेपाल के नए संबिधान लागू होने पर भारत और नेपाल की सीमा बंद होने से नेपाल में भारत की तरफ से निर्यात होने वाली वस्तुओं (अनाज और दवाइयों ) की कमी ने दोनो देशों के रिश्तों के बीच खटाई का काम किया है |
भारत को समझना चाहिए की नेपाल भी हमारा पड़ोसी देश है और हम अटल बिहारी बाचपेयी के कथन अनुसार 'हम पड़ोसी नहीं बदल सकते |' हमे नेपाल से संबंध और मधुर करने होगे तभी हम डैगन के बढ़ते प्रभाव को रोक सकते है |
शुभम शर्मा
छात्र, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय
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