प्रेम और धुव्र तारा
आप गुस्सा हो, बात मत करो जायज है, नाराजगी रिश्तों की कीमत बताने में मददगार होती है पर समय के साथ यह न बात करना बड़ी दूरियों को निमंत्रण देती है, आप मुझसे मेरी बात का ही रिर्फेश देकर बात न करने का बोली हो, अगर कहने में सार्थकता है, तो सुनने में भी समझ ही है, मुझे एक बात बताओ आपको मालूम है, कि आपके पालक आपके जीवन में चिरस्थाई और बरगद की छांव की तरह तो क्या आप उनकी महत्ता को नकार देगी, तो फिर किस प्रकार मैं आपके स्थायित्व को अन्यथा ले सकता हुं, आप मुझपर गुस्सा हो, क्रोध में हाथ उठाओं , मुझसे बात मत करो, कब तक नहीं करोगी यह आपका निर्णय है, पर मैं उस बुलबुले की तरह हुं जो सिर्फ पानी में आकार लेता है, अग्नि या मृदा में नहीं, आप शायद मुझे मृगतृष्णा समझ बैठी हो पर जल में मृगतृष्णा नहीं होती, पानी की सबसे बड़ी इकाई समुद्र होती है, पानी के जहाज उसी से एक देश से दूसरे देश में जाते हैं| दुनिया खोजने में समुद्र का यातायात काफी मददगार सिद्ध हुआ है, जब अंधेरे में चारों तरफ जल ही जल हो और जहाज चालक के पास दिशाय्ंत्र का अभाव हो तब प्रकृति रास्ता दिखाती है, धुव्र तारा वह प्राचीन प्रकृति द्वारा प्...