विरोंध की सीमारेखा
श्री नरेन्द्र मोदी जी भारत के एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री है जिनकी मॉ के सामने वह इस पद पर काब़िज हो सके किसी मॉ के सामने उसके पुत्र का इस पद तक पहुंचना मॉ और बेटे दोनों के लिए असीम आनंद की अनुभूति होती है एक 96 वर्ष की मॉ जिसका पुत्र इतने संघर्षों का सामना कर भारत का प्रधानमंत्री बना हो वह मॉ जो पढ़ी लिखी नहीं हैं जिसने दूसरों के घरों में काम करके अपना घर चलाया हो उसके पुत्र को इतनें बढ़े पद पर पहुंच कर अपनी मां का जिक्र आने पर अगर आँखे नम हो जाती हैं तो वह नौटकी कर रहे है ? लोगों की सांत्वना पाने के लिए मोदी जी ऐसा कह रहे है !!! ऐसी बाते सुनकर मन दुखी होता है भारत के प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह जो मॉ नहीं आयी शायद वह मॉ अपने बेटे के निवास 7Rcr कभी नहीं गई होगी ,हमे आज भी वह फोटो याद है जब मोदी जी की मॉ हीराबेन ने उनके जन्मदिन पर उपहार स्वरूप भगवतगीता के साथ कुछ रूपये शगुन स्वरूप दिए थे मॉ की ममता के आगे देवता झुकते है फिर मोदी जी तो एक इंसान हैं विरोध करे पर किसी की संवेदनाओं के साथ नहीं आखिर मॉ तो मॉ होती हैं |
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