हिन्दी हैं हम

हिन्दी अपने भाषा-भाषियों से प्रेम चाहती है| उसकी चाहत है कि उसके भाषा-भाषी उससे प्रेम करें| उनका खोट नहीं,आग्रह हो| श्राद्ध पक्ष का एक तर्पण नहीं, नित्य का समर्पण हो | हिन्दी का पहला जगत तो घर है | हिन्दी की मातृशक्ति से चाहत है कि वह अपनी संतान से अपनी भाषा में बात करें | इधर दूध की बोतल हटी,उधर बच्चे का अपनी भाषा से नाता टूट रहा है | इस स्थित को माताएं बदलें | हिन्दी की गिनती सिखाएं | हिन्दी की कविताएं याद कराएं | आंटी और अंकल की जगह पारिवारिक संबंध सूचक शब्दों का प्रयोग करें | उन्हे अपनी संस्कृति से जोड़े | बच्चों के सामने हिन्दी की खिल्ली न उड़ाएं |

स्कूल,कॉलेज,व्यावसायिक शिक्षण संस्थान ,जहां हिन्दी को यदा-कदा प्रवेश के अवसर मिले , उन अवसरों से भी वह निरंतर वंचित की जा रही है | हिन्दी की चाहत है कि उसके विरूद्ध लगाए गए आरोप कि वह रोटी नहीं दे सकती , निरस्त किया जाए | नरेन्द्र मोदी ने गॉव-देहात में हुनर का सवाल उठाया हैं | देशज ज्ञान और हुनर के लिए हिन्दी ही काम आएगी , हिन्दी यह जान - सुनकर कुछ - कुछ आश्वत है |
हिन्दी  की अपने देश - प्रदेश के नेताओं से चाहत है कि वह उसके ऋण को चुकता करें | हिन्दी का कहना है कि तुमने चुनाव में मत मांगने के लिए मेरा भरपूर उपयोग किया | तुम पर मेरा ऋण है | इस ऋण की भरपाई के लिए पंचायत से लेकर संसद तक मुझे मेरा उचित स्थान प्रदान करो | आज संसद के सिंहद्वार पर अंग्रेजी दीप्त अहं के साथ विराजमान है | वह मुझे भीतर आने से रोक रही है | कुछ ऐसा करो कि जिससे ये गतिरोध समाप्त हों |
हिन्दी को अपने प्रशासकों से चाहत है कि वे उसे अपने कार्यो में स्थान दें | नस्तियों और आदेशों में उसको उसका सही स्थान मिले |
प्रशासनिक उपयोग में अपने स्वरूप में वह सरल, सुबोध, सहज, और स्पष्ट हो | हिन्दी का कहना है कि मैं ही हूं जो प्रशासक और जनता को एक दूसरे के समीप ला सकती हूं | दोनों के बीच समीपता,संपर्क,संवाद नहीं होगा तो व्यवस्था सुचारू कैसे होगी |
हिन्दी की अपने विधिवेत्ताओं ओर न्यायाधीशों से चाहत है कि वे हिन्दी में न्याय दें | उद्योगपतियों और व्यापारियों से चाहत है कि जिस हिन्दी में अपने बही - खाते लिखकर उन्होंने अपना व्यवसाय बढ़ाया फिर अब मॉल, मार्ट, और बाजार से हिन्दी क्यों गायब कर दी | यहां भी वही स्थान मिले |
अनेक खिन्नताओं के बीच भी हिन्दी प्रसन्न है कि हिन्दी के अध्यापक ने तमाम विवशताओं के बावजूद उसका साथ नहीं छोड़ा | हिन्दी अपने अध्यापक को समझा रही है कि हम रण हारे हैं,हमने युद्ध नहीं हारा | हालांकि , अब वातावरण कुछ बदल रहा है | विभिन्न विश्वमंचों पर हिन्दी को प्रमुखता मिल रही है | विदेशों में बसे लोग याद करने लगे हैं | विदेश मंत्रालय भी हिन्दी में पत्रकारों को संबोधित करने लगा है | हिन्दी का कहना है कि डर लगता है कि कहीं यह सुयोग कुछ दिनों के लिए तो नहीं है | अकारण नहीं है यह डर | क्योंकि कई बार मुझे आगे बढ़ाकर पीछे धकेला गया |

(डॉ. देवेन्द्र दीपक जी का लेख पत्रिका से लिया गया है  )

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