साध्वी प्रज्ञा ठाकुर बनाम दिग्गी राजा

भोपाल से प्रज्ञा ठाकुर जी को भाजपा ने टिकट दिया है, जिन्होंने कभी भोपाल के मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद नहीं की है, वह कट्टर हिंदूत्व के बलबूते अपनी राजनीति साधती आई है, लेकिन उनपर एक प्रचारक की  हत्या का आरोप लगा है, जो कि उन्ही की विचारधारा का व्यक्ति था, भोपाल शुरू से गंगा जमुनी तहजीब का शहर रहा है, जहां पर्दा, जर्दा और गर्दा के शहर से लेकर एक स्वच्छ राजधानी के रूप में अपनी पहचान बनाई है,



सांसद जनता का सेवक होता है लेकिन प्रज्ञा दीदी के हाव भाव कही से भी सेविका जैसे नहीं है, जहां अमेरिका जैसा देश शस्त्र कानून के खिलाफत में अपनी आवाज बुलंद कर रहा है, वही वह सभी के हाथों में हथियार देखना चाहती है, भोपाल सीहोर लोकसभा सीट में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का मुकाबला कांग्रेस के दिग्गी राजा से है, जो नर्मदा परिक्रमा करके खुद के हिंदूत्व को पिछले तीन वर्षों में मजबूत करते नजर आएं है, उन्होंने जबलपुर में विद्यासागर महाराज, झोतेश्वर में स्वरूपानंद सरस्वती, रायसेन में दरगाह में हाजरी लगाकर एक साथ हिंदू, मुस्लिम और जैन धर्म के धर्म गुरु और धार्मिक स्थलों पर माथा टेका है, भोपाल क्षेत्र के मंदिर मंदिर सर नवाते दिग्गी राजा ने खुद की हिंदू विरोधी छवि को धो दिया है, भोपाल अधिकतर  ब्राह्मण और कायस्थ समाज के सांसदों को चुनकर ही संसद भेजता है, इस बार मुकाबला दो ठाकुरों के बीच है, भोपाल में मुद्दा विकास से इतर मेरा प्रत्याशी बड़ा हिंदू तक सिमटता दिख रहा है, दोनों नेता बाहरी है, दिग्गी राजा जहां 2003 के विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार मैदान में हैं वहीं प्रज्ञा ठाकुर का यह पहला चुनाव है, एक राजनीतिक कमबैक की उम्मीद लेकर चुनाव में है तो दूसरी राजनीति में पांव जमाने भाजपा की सुरक्षित सीट से उतरी है, अब यहां के रोमांचक मुकाबले से एक बात तो पक्की है भोपाल से एक अच्छा वक्ता संसद जाने वाला है, जिसे सुनकर लोकसभा में सभी मेजे पीटेंगे, अब वह राजा होंगे या साध्वी यह 23 मई को ही पता चलेगा, लेकिन दोनों दलों का एजेंडा अभी आतंकवादी और मिस्टर बंटाधार तक ही सीमित दिख रहा है.

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