मेरा धर्म एक षड्यंत्र है

मेरा धर्म एक षड्यंत्र है
मेरा नमाज पढ़ना एक षड्यंत्र है
मेरा चुपचाप रहना एक षड्यंत्र है
मेरा सोने से जागना एक षड्यंत्र है
मेरा दोस्त बनाना एक षड्यंत्र है
मेरी अनभिज्ञता, मेरा पिछड़ापन एक षड्यंत्र है



इसमें कोई षड्यंत्र नहीं है कि
हिंदूओं द्वारा मुझे शरणार्थी बना दिया जाए
जिस मुल्क में मैं पैदा हुआ हूं
इसमें कोई षड्यंत्र नहीं है कि
उन हवाओं को जहरीला बना दिया जाए
जिसमें में सांस लेता हूं

खादर मोहिउद्दीन (तेलगु कवि) 1995

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