भेड़चाल बनाम रानी मधुमक्खी

दुनिया में दो तरह के लोग पाये जाते है, पहले वो जो कुछ कर जाते है और दूसरे वो जो सिर्फ करने की सोच में ही डूबे रहते है, पहली प्रजाति के लोग सफल या असफल होते पर दूसरे तरह के लोग न करने की सो वजह बताते है, वाजिब है सो में से 2 कारण व्यवहारिक होते है, पर कोई कार्य ठान कर भी नहीं करना मानव स्वभाव के विपरीत है, हमे अक्सर बताया जाता है, की फलाने साहब ने इतनी महंगी कार खरीद ली जब वह घर से निकलते है, तो राम राम करने वालो की भीड़ सी लग जाती है, पर वास्तविकता में कुछ खालीपन सा लोगों की दौड़ भाग वाली जिंदगी में दिख ही जाता है, कुछ लोग रिश्तों की पहल करने का सोच रहे है तो कुछ  पुराने बन्धनों को तोड़ने में समय गवारहे है, किसी ने  बहुत खूब कहा है कि  लोग अक्सर नींद में जी रहे है उन्हें आधी उम्र तो यह ही नही पता कि वह करना क्या चाहते है? जब वह जागृत अवस्था में आते है, तब तक उनकी संभावनाओ की समय सीमा खत्म हो जाती है, हमे इतिहास इसीलिए पढ़ाया जाता है, की हम पुरानी की गई गलतियों को न दोहराये, पर जो गलती युद्ध के मैदान में पृथ्वी राज चौहान ने की थी वोही गलती बटवारे के समय शीर्षस्थ भारतीय नेताओं ने की है, ज्यादा दूर न  जाये तो कांग्रेस के साथ सरकार चलाने की जो गलती चौधरी चरण सिंह ने की वही गलती देवगौड़ा ओर गुजराल ने भी दोहराई थी. हमारी शारीरिक उम्र चाहें 35 साल हो पर हम 19 साल के दिमाग को लेकर जी रहे है यही वह दिक्कत है की कम मानसिक विकास होने के कारण हम ऐसी घटनाओं को अंजाम दे देते है, जो हमसे अपेक्षा नहीं कि जाती है, हमें एक जामवंत चाहिए जो हमे हमारे कौशल को हमारी महत्वकांक्षाओं से एकसार कर सके, महाभारत में पांडव कृष्ण की सलाह लेते थे और कौरव शकुनि की यही वह मूल बिंदु है कि 100 कौरवो पर 5 पांडव विजयी हुए, पर हम सोये हुए है कि कोई गांधी, जेपी ओर अन्ना आये और हम कूद पड़े मैदान में, पर हमारी खुद की सोच हमारे अंतर्मन की आवाज का क्या? हम वो क्यो दबा रहे है, उसे हम क्यो बेड़ियों में जकड़ रहे है, जंगल में भेड़ चराने गए व्यक्ति की सारी भेड़ें अपने आगे वाली भेड़ का अनुसरण करती है, पहली भेड़ अगर मार्ग भटक जाती है तो सारी भेड़ तितर बितर हो जाती है, इसे ही भेड़चाल कहते है, क्योकि उनमे सोच समझ की शक्ति कमतर है, ओर पहली भेड़ में नेतृत्व कौशल का गुण नही होता है, वही रानी मधुमक्खी अपने नेतृत्व करने के गुण के आधार पर एक छत्ता बनाती है, जिसमे दूसरी मधुमखिया अपनी रानी को फ़ॉलो करती है, सब खेल सोचने की ताकत का है. तय हमे करना है कि हमे भेड़चाल का हिस्सा बनना है, या रानी मधुमखी , हमे अपने आगे खड़े तथाकथित लीडर को भी खुद ही चुनना है, ताकि हम शहद बनाये न कि दूसरों के हाथों लाठी से हाके जाये.

#चेतन्य_की_ओर

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