मंगो देवी शर्मा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी
परिचय
स्वर्गीय मंगो देवी शर्मा
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी
वास्तविक नाम :- नर्मदा (मंगलवार के दिन मन्नत के स्वरूप जन्म लेने के कारण मंगो नाम पड़ा)
जन्म:- 01 जनवरी 1924 दिन मंगलवार गोबर्धन जिला मथुरा उत्तरप्रदेश
पिता :- स्वर्गीय मास्टर श्यामलाल शर्मा
माता :- स्वर्गीय किरण देवी शर्मा
माता :- स्वर्गीय किरण देवी शर्मा
शिक्षा:- वैघ विशारद तक
पेशा :- आठवी तक अध्ययन के बाद जतीपुरा जिला मथुरा में बतौर शिक्षक सेवा दी, बतौर वैघ 1992 ई तक जैन परमार्थ औषधालय में निशुल्क सेवायें दी
स्वतंत्रता संग्राम में योगदान:- (मंगो देवी शर्मा के शब्दों में)
जब मैने भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिया था , तब मेरी उम्र 18 वर्ष थी , हमारा परिवार क्योकि क्रांतिकारी गतिविधियों में संलिग्न था , इसीलिए मेरे पति स्व छोटेलाल शर्मा व मैं भोपाल में रहने लगे , क्योकि यहां नबाव का शासन था , तो अंग्रेजों का सीधा हस्तक्षेप नहीं था| मेरे पति और मैं भोपाल में कांग्रेस की लोकल इकाई में थे , जिसके द्वारा हमे पता चला कि गांधीजी ने 8अगस्त की रात्री भारतछोड़ो आंदोलन की शुरूआत की है, हम लोगो ने भी भोपाल में अंग्रेजों सरकार के विरूद्ध प्रदर्शन किया| भारत माता की जय , वंदे मातरम, करेगे या मरेगे जैसे नारो का घोष होता था,
उस समय भोपाल, सीहोर जिले के अधीन होता था , हम आंदोलनकारियों को अंग्रेजी पुलिस ने पकड़ा और होशंगाबाद जेल में बंद कर दिया, हम को 7महीने जेल में बंदी रहे ,मैं तब 18वर्ष की थी, मेरे साथ मोहनीदेवी , रूकमणी देवी सहित अन्य महिलाएँ बंदी रही |
उस समय भोपाल, सीहोर जिले के अधीन होता था , हम आंदोलनकारियों को अंग्रेजी पुलिस ने पकड़ा और होशंगाबाद जेल में बंद कर दिया, हम को 7महीने जेल में बंदी रहे ,मैं तब 18वर्ष की थी, मेरे साथ मोहनीदेवी , रूकमणी देवी सहित अन्य महिलाएँ बंदी रही |
भारत 15अगस्त 1947 में आजाद हुआ ,पर भोपाल में नबाव हमीदुल्लाह खॉ का शासन था , इसीलिए हम सभी ने भोपाल विलीनीकरण आंदोलन चलाया , जिसके बाद 1949 में भोपाल भारत में शामिल हुआ |
इस आंदोलन का नेत्तत्व मास्टर लाल सिंह, शंकरदयाल शर्मा समेत अन्य नेताओं ने किया |
इस आंदोलन का नेत्तत्व मास्टर लाल सिंह, शंकरदयाल शर्मा समेत अन्य नेताओं ने किया |
आजादी के बाद देश में क्रांति के मूल्यों को जगाए रखने के लिए हमारे राजनीति व समाजसेवा व पत्रकारिकता को माध्यम बनाया |
संस्मरण
मुझे 15अगस्त 2011 को राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटिल से अलंकरण सम्मान प्राप्त हुआ , पूर्व में राष्ट्रपति ज्ञानी जेल सिंह से भी राजकीय सम्मान हुआ है , जब हमलोगो ने जंग ए आजादी में भाग लिया था ,तब हम 16- 17साल के थे आज 94 वे वर्ष की देहलीज पर भी देश के प्रति माँ जैसा दुलार कम नहीं हुआ है , हमने जब घर से आजादी की अलख जगाने निकलेगी थे , तब महिलाएँ भोपाल में जुमेराती गेट से इमामी गेट तक का सफ़र भी कम्बल चादर औढ़ कर करती थी आजादी के समय सा न अब माहौल बचा है , न ही लोग ,2साल पहले तक 70 साथी भोपाल में जीवित थे पिछले साल 15अगस्त तक 14 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जीवित थे , हम लोग स्वतंत्रता दिवस से कार्यक्रम में ही व्हील चेयर पर सवारी लेकर मिलते है और एक दूसरों को जय हिन्द कहकर युवा उम्मीदों भरी नजरों से हम देखते है |
मृत्यु
वरिष्ठ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मंगो देवी शर्मा का निधन. . वरिष्ठ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महामहिम राष्ट्रपति से सम्मानित मंगो देवी शर्मा का लंबी बीमारी के बाद 94 वर्ष की आयु में दिनाकं 10 अक्टुबर 2017 को सुबह 6.15 बजे निधन हो गया , उनका राजकीय सम्मान के साथ भदभदा विश्राम घाट में अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें सातवी बटालियन की टुकडी ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया|




टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें