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तुक़

व्यस्त है अपनी व्यस्ताओं में दो पल के सुकून की तलाश में... प्रियसी निहारन हम चले कन्या मिली न कोएं ऐसी प्रियसी चाहिए जो प्रिया निंहारन होए |                            शुभम

पछतावा

अक्सर मुझे मेरे परिचित्त संचेत करते है कि मैं लोगों को घूर कर या यू कहे की गुस्से वाली नज़रों से देखता हुँ ़ हां भाई हो सकता है कि यह मेरे अंदाजे - ए - बय़ा का  जऱिया बन गया हो पर...

भारत की राजनीति में बढ़ती चमचचो की तादाद

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राजनीति में बढ़ती चमचागिरी आज के समय में राजनीति के मायने बदल गए है पहले राजनीति समाजसेवा का जऱिया था पर आज राजनीति प्रसिद्धी पाने का साधन बन गया है | पहले तो राजनीति की तर...