अक्सर मुझे मेरे परिचित्त संचेत करते है कि मैं लोगों को घूर कर या यू कहे की गुस्से वाली नज़रों से देखता हुँ ़ हां भाई हो सकता है कि यह मेरे अंदाजे - ए - बय़ा का जऱिया बन गया हो पर...
राजनीति में बढ़ती चमचागिरी आज के समय में राजनीति के मायने बदल गए है पहले राजनीति समाजसेवा का जऱिया था पर आज राजनीति प्रसिद्धी पाने का साधन बन गया है | पहले तो राजनीति की तर...