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अंधभक्ति की शुरुआत इंदिरा गांधी के समय से हुई

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आज के समय में अंधभक्ति शब्द बड़े प्रचलन में है, सरकार के पक्षकारो को अंधभक्त की संज्ञा दे दी जाती है। यदि देश के राजनीतिक इतिहास के पन्नों को पढ़ा जाएगा तो अंधभक्ति के दौर की शुरुआत इंदिरा के प्रधानमंत्रित्व काल में हुई, जब हिंदी के आदिकाल में वर्णित दरबारी कवियों का स्थान नेताओं ने ले लिया, चारण नेताओं का समय यही था। तत्कालीन कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवकांत बरुआ ने कहा था, कि इंडिया इज इंदिरा एंड इंदिरा इज इंडिया यानि इंदिरा गांधी ही भारत है और भारत ही इंदिरा है। उनके इस वक्तव्य को हिटलर के समर्थकों द्वारा दिलाई जाने वाली शपथ से जोड़ा जा सकता है, जिसमें सैनिको को इसी तरीके की शपथ दिलाई जाती थी, कि हिटलर ही देश है। जब इंदिरा ने आपातकाल के दौरान भारत के लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाई थी, जब जयप्रकाश नारायण, मोरार जी सरीखे नेता जेल में बंद थे, तब उन्होंने कहा था कि मेरे पिता लंबे अरसे तक जेल में बंद रहे हैं और उन्होंने संघर्ष के दौरान किताबें लिखी है, आज इन नेताओं को भी संघर्ष करना चाहिए। भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री आज भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जयंती...

जब राजेंद्र प्रसाद के घर में छुआछुत का शिकार हुए महात्मा गांधी

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भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र बाबू भारत में राष्ट्रपति का पद कई बार रबर की मोहर जैसा प्रतीत होता है। आलोचक आलोचना करते हैं , कि कहने को तो यह देश के राजा है लेकिन यह मंत्रिमंडल की सलाह पर निर्भर है। सत्ताधारी पार्टी व प्रधानमंत्री को ताक पर रखकर यदि राष्ट्रपति कोई निर्णय ले ले ऐसी स्थिति भारतीय इतिहास में इक्का दुक्का ही दर्ज की गई है। वैसे आज हम ऐसे राष्ट्रपति की बात करने वाले हैं जिन्हें इस पद का प्रतिमान माना जा सकता है , उनकी शख्सियत इस पद से भी ऊंची थी। जीवनपर्यंत गांधीवादी कहलाने वाले राजेंद्र बाबू वह व्यक्ति थे , जिनके घर पर गांधीजी ने छूआछूत को   महसूस किया है। गांधीजी ने इस घटना को अपनी आत्मकथा में शामिल किया है , उन्होंने लिखा है कि "मैं (गांधी) और राजकुमार शुक्ल (चंपारण के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी) राजेंद्र बाबू के पटना स्थित घर गए वहां हमे बताया गया कि राजेंद्र प्रसाद किसी जरूरी काम से पुरी गए हुए हैं , हमने उनसे पूछा कि क्या हम थोड़ी   देर यहां बैठ सकते हैं ? वहां के सेवकों ने हमें ऊपर से नीचे तक देखा , जिसके बाद हमें मुख्य बैठक घर में न बिठाकर बा...