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सितंबर, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कलम के सिपाही

नासमझी और उतावलेपन में उठाये गये...... . . "कदम","कलम"और "कसम" तकलीफ ही देते हैं...   कलम की असली ताकत तो इन पत्रकारों ने भावी पीढ़ी को सिखाई है जीवन भर कलम की सेवा करने वाले पत्रकार जो कि ए...

हिन्दी हैं हम

हिन्दी अपने भाषा-भाषियों से प्रेम चाहती है| उसकी चाहत है कि उसके भाषा-भाषी उससे प्रेम करें| उनका खोट नहीं,आग्रह हो| श्राद्ध पक्ष का एक तर्पण नहीं, नित्य का समर्पण हो | हिन्दी का ...

मिट्टी का मिट्टी में

मिट्टी से जुड़ा हुँ में मिट्टी में ही समा जाना हैं पॉव जम़ीन पर ही रहेगे मेरे हमेशा नज़रों को आसमां से भी पार ले जाना हैं | सागर चौधरी