संदेश

फ़रवरी, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मेरा वेलेंटाइन जो अब जिंदा नहीं है

बहुत सारी बातें थी जो दिल ही दिल में रह गई या यूं कहें होठों से बाहर ही नहीं निकली, जब आंख  बंद करता हूं तो लगता है बहुत कुछ बताने को था बहुत कुछ करने को था पर अम्मा अब तुम देख नहीं पाओगी,  अगर देखती भी होगी तो मैं तुम्हारे हाव-भाव कैसे समझु  कि तुम खुश हो या दुखी घर से निकलने से पहले जब तुम्हारा आशीर्वाद तुम्हारा हाथ मेरे सर पर आता था तो लगता था कि कोई भी ताकत मेरा कुछ नहीं बिगड़ पाएगी मुझे ऐसा लगता था कि हां मेरे पीछे मेरी रीढ़  की हड्डी मेरी अम्मा  है पर अब तुम इस लोक में ही नहीं हो, बहुत कुछ कहने को था बहुत कुछ समझने को था बहुत सारी बातें थी जो  टुकड़ों टुकड़ों में मैं सोचता तो हूं पर कहूं कैसे?  मैं कागज में बंद करके रखता हूं, पर वह कागज खोलने का साहस मुझमें नहीं है.  जब मैं घर के बाहर होता था तो  मैं सिर्फ इसलिए जल्दी घर जाता था कि तुम घर में मेरा इंतजार कर रही होती थी. तुम पड़ोसियों को परेशान कर करके बार बार फोन लगवाया करती थी, तुम्हारे चक्कर में सबके पास मेरा नंबर चला गया, तुम कहलवाती थी  कि बेटा जल्दी आजा, उस फोन का ...