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वोट‌ देते समय प्रत्याशी की जाति मत देखना

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देश में चुनावी समा है, जल्द ही देश के प्रथम सेवक के लिए कई सौ जनता के सेवक वोट करेंगे, इन 543 सेवकों को चुनने के लिए ही असली मारामारी होने वाली है, किसी को पंजे वाला प्रत्याशी दमदार दिखेगा, तो किसी को कमलछाप उम्मीदवार धरती पकड़ नजर आयेगा,  कोई वोटिंग मशीन में अपनी जाति के नेता को वोट देकर आयेगा ले देकर यह चुनाव काफी रोमांचक सिद्ध होने वाला है, रोमांचक इसीलिए क्योंकि हम वोट देने में गंभीरता का चोला कभी पहनते ही नहीं है हम तो चुनावों में अपनी जाति चुनने वाले है, पहले तो जब भी सही था जब हम वोट के प्रति उदासीनता के लिए हमारे कम पढ़े लिखे होने का रोना रो दिया करते थे पर इस समय देश की साक्षरता दर पिछले आम चुनाव के वोटिंग प्रतिशत से ज्यादा है, लेकिन वोट डालते समय हम विकास के विजन की जगह नेताओं के खोखले भाषण को ज्यादा तवज्जो देते है, अभी हम स्वप्रचारित देश भक्ति के माहौल से बाहर निकले है जब देश के वाशिंदे अपने घर से ज्यादा टीवी स्क्रीन पर नजरें गढ़ाए हुए थे या साफ तौर पर कहा जाएं तो पड़ोसी मुल्कों की जमीन पर खून के छीटे ढूंढने की जुगत में लगे हुए थे लेकिन वह एक उन्माद था और अब असली देश भक...